भारतीय दण्ड संहिता : भारतीय दण्ड संहिता में जोड़ी गई नई धारायें - 02

क्रमशः...

b. धारा 174 के पश्चात निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की गई, अर्थात – “174-क, 1974 के अधिनियम 2 की धारा 82 के अधीन किसी उद्घोषणा के उत्तर में गैरहाजिरी – जो कोई दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा के अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान पर विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होने में असफल रहता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जार्गा और जहाँ उस धारा की उपधारा (4) के अधीन कोई ऐसी घोषणा की गई है जिसमें उसे उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है, वहाँ वह कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जार्गा और जुर्माने का भी दायी होगा।“

c. धारा 229 के पश्चात् निम्न्लिखित धारा अन्तःस्थापित की गई, अर्थात् – 229-क. जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता – जो कोई किसी अपराध से आरोपित किए जाने पर और जमानत पर या अपने बंधपत्र के निबंधनों के अनुसार न्यायालय में पर्याप्त कारणों के बिना हाजिर होने में (वह साबित करने का भार उस पर होगा) असफल रहेगा वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण – इस धारा के अधीन दण्ड –

  1. उस दण्ड के अतिरिक्त है, जिसके लिए अपराधीअपराधी उस अपराध के लिए जिसके लिए उसे आरोपित किया गया है, दोषसिध्दि पर दायी होगा, और
  2. न्यायालय की बंध पत्र के समपहरण का आदेश करने की शक्ति पर प्रतिकुल प्रभाव डालने वाला नहीं है।“
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