"अफस्पा" एक विशेष प्रकार का कानून है जिसे भारतीय संसद द्वारा सन 1958 में लागू किया गया था। "AFSPA" शब्द का पूर्ण रूप (Armed Forces Special Powers Act) है, जिस का हिंदी अर्थ ससस्त्र बल विशेष अधिकार कानून है ।
इसे मुख्य रूप से अशांति वाले क्षेत्रों में लगाया जाता है, इसके तहत सैनिकों को एक विशेष प्रकार की शक्ति प्रदान की जाती है। शुरुआत में यह कानून उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए बनाया गया था । जिसमें असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित पूरे उत्तर पूर्वी क्षेत्रों को कवर किया गया था। इसका मूल्य उद्देश्य यहां पर हो रहे दंगों और हिंसा पर काबू पाना था।
1990 में "अफस्पा" कानून जम्मू कश्मीर में भी लगाया गया, ताकि यहां हो रहे आतंक को कम करके हिंसा पर काबू पाया जा सके। जबकि लद्दाख क्षेत्र को इस कानून से बाहर रखा गया है।
"अफस्पा" कानून द्वारा सैनिकों को मिले प्रमुख अधिकार-
1- जहां पर इस कानून को लगाया जाता है, उस क्षेत्रों में असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट से गिरफ्तार किया जा सकता है।
2- किसी के भी घर की बिना वारंट तलाशी ली जा सकती है।
3- वाहन रोककर उसकी तलाशी लेने का अधिकार है।
4- और इस एक्ट के तहत सैनिकों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती है। अतः इसे सैनिक बचाओ एक्ट भी कहा जाता है।
रोचक जानकारी----
1 अप्रैल 2018 में मेघालय राज्य से "अफस्पा" कानून को हटा लिया गया है।
और हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के 3 जिलों से "अफस्पा" कानून को हटाया गया है। किंतु म्यांमार से सीमा साझा करने वाले जिलों में लागू रहेगा।
सैनिक के इस विशेषाधिकार की वजह से मानव के कुछ अधिकारों का हनन होता है। अतः इस कानून में थोड़ी बहुत ढिलाई बर्ती जाए, ये बातें चर्चा में है।