अच्छा अभिशासन एवं लोकतंत्र में कुछ विरोधी मुद्दे

नवीन लोक प्रबंधन तथा सुशासन एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित है। इस कारण सुशासन में विशेषज्ञों को प्रोत्साहित किया जाता है जबकि लोकतंत्र में एक आम व्यक्तियों के सशक्तिकरण पर बल दिया जाता है।

*लोकतंत्र की मांग है कि लोक नीतियों एवं कार्यक्रमों का निर्धारण लोकमत के अनुसार किया जाए जबकि सुशासन के अंतर्गत बहुत से नीतियों के निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का प्रभाव दिखाई देता है।

*सुशासन के अंतर्गत बहुत से निर्णय के मार्ग ऊपर से नीचे की ओर आकर्षित होते हैं जबकि लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए यह मार्ग नीचे से ऊपर की ओर होना चाहिए।

*विश्व बैंक के शीर्ष निर्णयन के स्तर पर संरचनात्मक असंतुलन है अर्थात मताधिकार कुुुछ के पास होता है जबकि लोकतंत्र की अवधारणा में मताधिकार सभी को प्राप्त होता है।

*वैश्विक स्तर की संस्थाओ में विकसित समाजों का प्रभुत्व है परिणाम स्वरूप विकसित समाज का विकासशील समाज पर प्रभाव दिखाई देता है। *अंतरराष्ट्रीय संस्थाये वित्तीय सहायता देते समय विभिन्न शर्ते रखती हैैं जो एक लोकतांत्रिक संप्रभुता वादी स्वतंत्र स्वनिर्णय में बाधा उत्पन्न करती है।

*एक ओर आर्थिक उदारवादी विषयों की ओर झुकाव दिखाई देता है तो दूसरी ओर समानता। लेकिन व्यवहारिक रूप में देखा जाए तो दोनों की बीच विरोधाभास।

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