सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 को 2008 में संशोधित किया गया। इसमें साइबर अश्लीलता को लेकर कठोर कदम उठाए गए हैं। अधिनियम की धारा 67- ए में इलेक्ट्रॉनिक अश्लीलता के लिए दंड की व्यवस्था है। बाल नग्नता /अश्लीलता की धारा 67- बी में उल्लेख है, जिसका उद्देश्य यौन शोषण को रोकना है। दोनों में 5 वर्ष की सजा का प्रावधान है। अगर दूसरी बार किया जाता है तो यह सजा 7 वर्ष तक हो सकती है।
धारा 59(सूचना का अवरोधन,निगरानी तथा अवमूल्यन प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) तथा धारा 69-बी सूचना आंकड़ों से संबंधित है। मामलों के निष्पादन हेतु धारा 46 का प्रावधान है। धारा 46 तथा 47 मुआवजे के बारे में है। धारा 48 में साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन की बात की गई है। धारा 66-बी के अंतर्गत कंप्यूटर नेटवर्क से चुराई गई या गलत तरीके से हासिल की गई जानकारियों को अपने पास रखने पर 3 साल का अधिकतम कारावास अथवा 1 लाख का आर्थिक दंड देना होगा धारा 66-सी के अंतर्गत यदि कोई धोखे से किसी अन्य को इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर पासवर्ड या निजी पहचान की जानकारी चुरा कर उसका गलत इस्तेमाल करता है तो 3 साल का कारावास अथवा 1 लाख का आर्थिक दंड देना होगा। धारा 66- डी के अंतर्गत यदि कोई सूचना तकनीक के किसी भी माध्यम से अपनी पहचान छुपा कर दूसरे की पहचान का प्रयोग करता है तो अधिकतम 3 साल का कारावास अथवा 1 लाख का आर्थिक दंड देना होगा धारा 66-ई के अंतर्गत किसी की निजता भंग करने पर अधिकतम 3 साल का कारावास अथवा 2 लाख का आर्थिक दंड देना होगा।
*साइबर अपराधों से निपटने हेतु केंद्र सरकार ने सुरक्षा नीति 2013 की घोषणा की है। इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) होगी जो साइबर सुरक्षा से जुड़े सभी मामलों की निगरानी करेगी तथा लोगों की भूमिका व दायित्व पर ध्यान देगी। इसके अतिरिक्त नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (NCIIPC) भी सूचना स्त्रोतों की डिजाइन तैयार करने व संचालन पर ध्यान देगा।