*आज राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में बार-बार राजनीति सत्ता में बदलाव दिखाई देता है। उस बदलाव का प्रभाव लोक प्रशासन में भी दिखाई देता है कि स्थानांतरण एवं विभाग में परिवर्तन दिखाई देता है। अतः कार्यकाल में स्थायित्व का अभाव होता है। ऐसी स्थिति में अदक्षता का होना स्वाभाविक है।
*लोक प्रशासन के अंतर्गत आलसी एवं अकार्यकुशल अधिकारियों से छुटकारा पाना इतना आसान नहीं है जितना कि निजी प्रशासन के अंतर्गत। क्योंकि लोक प्रशासन के अंतर्गत अधिकारियों को कार्यकाल की सुरक्षा प्रदान की जाती है। निजी प्रशासन के अंतर्गत अच्छे कार्यकर्ता को प्रोत्साहित किया जाता है तथा आलसी कार्यकर्ता को हतोत्साहित किया जाता है। जबकि लोक प्रशासन के अंतर्गत ऐसा देखने को नहीं मिलता है।
*निजी प्रशासन के अंतर्गत वित्त या अन्य मामलों में अनुमति प्राप्त करने के लिए उतनी समस्या नहीं है जितनी की लोक प्रशासन में, क्योंकि लोक प्रशासन के अंतर्गत बाह्य वित्तीय नियंत्रण दिखाई देता है।
*लोक प्रशासन अपने उद्देश्य के संदर्भ में निजी प्रशासन की तुलना में अधिक अस्पष्ट एवं अपरिभाषित हैं। जिस कारण कार्य संचालन में भ्रम की स्थिति दिखाई देती है।