भारत के भागों में अलग-अलग धर्मो तथा हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी तथा जैन के अनुयायी रहते हैं। प्रत्येक धर्म कई मतों में बटा हुआ है देश में विभिन्न धर्मावलंबी अवश्य हैं, परंतु उन सभी को अपनी पद्धति के अनुसार पूजा पाठ करने का अधिकार है। यहां धार्मिक विविधता कभी-कभी आपसी मतभेद को बढ़ा देती है, जो संप्रदायवाद, आतंकवाद, अलगाववाद, आदि को जन्म देती है। मतभेदों के कारण धार्मिक विविधता राष्ट्रीय एकता व अखंडता के लिए जोखिम पूर्ण साबित हो सकती है। भारत के विभिन्न प्रांतों में अनेक भाषाएं एवं बोलियां अस्तित्व में है। वर्तमान में भारत के संविधान द्वारा 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है। भाषाई सघनता ने साहित्य को बढ़ाया है। भाषाई आधार पर राज्यों की मांग भी समय-समय पर उठती रही है, भाषाई आधार पर यह कटूता जोखिम पूर्ण साबित हो सकती है।
इसी प्रकार भारत के अन्य क्षेत्रों में सांस्कृतिक विविधता दिखाई पड़ती है, यहां विभिन्न नृत्य शैलियों के अतिरिक्त भारतीय पाश्चात्य कला, मूर्तिकला तथा वास्तुकला के विविध रूप देखने को मिलते हैं। यह सभी एक दूसरे के पूरक साबित हुए हैं इस प्रकार स्पष्ट है कि भारत में विविधता खांसी लाभदायक रही है। यद्यपि की कभी-कभी इसके जोखिम पूर्ण तत्व उभरे हैं किंतु यह क्षणिक ही रहा है इसके विभिन्न भागों में एक दूसरे के साथ निकट का संबंध है। यह उसी प्रकार का संबंध है जिस प्रकार का संबंध शरीर और उसके विभिन्न अंगों के बीच पाया जाता है।
भारत विविधता के बावजूद एक है इसकी संस्कृति धर्म भाषा विचार और राष्ट्रीयता सभी देशवासियों को एकता के सूत्र में पिरोते हैं तथा देशवासियों में जन्म भूमि के प्रति अगाध प्रेम पैदा करते हैं।