लोक प्रशासन का महत्व

समाज मे कानून एवं व्यवस्था को बनाये रखना, राजस्व की वसूली करना, न्याय की उत्तरोत्तर प्राप्ति, युवाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य यह सभी कार्य लोक प्रशासन के द्वारा किया जाता है ।

प्रशासन सरकार का एक कार्यकारिणी अंग है,अर्थात सरकार के द्वारा जिन नीतियों का निर्धारण किया जाता है। उसका सफल क्रियान्वयन लोक प्रशासन के द्वारा किया जाता है। अर्थात लोक प्रशासन सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक साधन है। विशेषकर भारत जैसे विकासशील समाजों में जहां गठबंधन सरकारों का दौर चल रहा है अर्थात राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण दिख रहा है ।ऐसी स्थिति में लोक नीतियों में निरंतरता प्रदान करने का कार्य लोक प्रशासन के द्वारा किया जाता है क्योंकि यह एक स्थाई कार्यपालिका है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी देशों को आजादी मिली जिसे तृतीय विश्व या विकासशील समाज की संंंंज्ञा प्रदान की जाती है। इन समाजों को विरासत के रूप में केवल समस्याएं मिली। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए लोक प्रशासन का विशेष महत्व है अर्थात लोक प्रशासन सामाजिक आर्थिक परिवर्तन के साधन के रूप में कार्य करता है। लेकिन जहां विकसित समाजों में इसकी भूमिका गुणात्मक है वही विकासशील समाज में मात्रात्मक है।

राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को मजबूती प्रदान करने के लिए लोक प्रशासन का विशेष महत्व है।

लोक प्रशासन का महत्व एक अध्ययन के विषय के रूप में स्वीकार किया गया। साथ ही साथ कौटिल्य का भी मानना है कि प्रशासनिक कला में दक्षता को प्राप्त करने के लिए प्रशासन की उपयुक्त जानकारी का होना आवश्यक है।

लोक प्रशासन के द्वारा निजी प्रशासन को सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही साथ यह भी देखा जाता है कि निजी प्रबंधन लोक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तो लोक प्रशासन का महत्व बढ़ना स्वाभाविक है।

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