दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : प्रारम्भिकी (धारा 1-5) - संज्ञेय तथा असंज्ञेय अपराध में अन्तर

संज्ञेय तथा असंज्ञेय अपराध में अन्तर

  1. संज्ञेय अपराध घातक स्वरूप के होते है इसके विपरीत असंज्ञेय अपराध सामान्य प्रवृत्त के होते है।
  2. संज्ञेय अपराध की दशा में पुलिस अधिकारी अभियुक्त को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है किन्तु असंज्ञेय अपराध की दशा में पुलिस अधिकारी अभियुक्त को बिना वारंट के नही गिरफ्तार कर सकता है।
  3. संज्ञेय अपराध घटित होने की रिपोर्ट पुलिस थाने के भार-साधक अधिकारी को की जाती है जबकि असंज्ञेय अपराध की दशा में अपराध घटित होने के बारे में परिवाद मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होता है।
  4. संज्ञेय अपराध मेर्न पिउलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना ही अन्वेषण का कार्य प्रारम्भ कर सकता है जबकि असंज्ञेय अपराध की दशा में पुलिस अधिकारी मामले के अनुसंधान का कार्य मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बिना नहीं कर सकता है।

संज्ञेय अपराध

1.संज्ञेय अपराध गंभीर प्रकृति के अपराधों की श्रेणी में आते है। जैसे:-

  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 हत्या।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304b दहेज़ मृत्यु।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376 बलात्कार।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 379 चोरी।

2.संज्ञेय अपराधों में अधिक सजा का प्रावधान है, अर्थात कुछ अपवादों के अलावा संज्ञेय अपराध में 3 साल या 3 साल से अधिक कारावास का प्रावधान है।

3.संज्ञेय अपराधों के मामलो में पुलिस को पूरा अधिकार है कि वह अपराधी / अभियुक्त को बिना किसी वारण्ट के गिरफ्तार कर सकती है।

4.संज्ञेय अपराधों के मामलो में पुलिस को यह पूरा अधिकार है कि वह संज्ञेय मामलो में मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना ही मामलें जाँच कर सकते है।

5.संज्ञेय अपराधों के मामलो में अपराध की कार्यवाही करने के लिए शिकायत (complaint) नहीं करनी पड़ती।

असंज्ञेय अपराध

1.असंज्ञेय अपराध गंभीर प्रकृति के अपराधों की श्रेणी में न आकर ये सामान्य प्रकृति के होते है जैसे :-

  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 193 झूठे साक्ष्य देना।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 323 स्वेच्छा उपहति करीत करना।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 352 आक्रमण, आपराधिक बल प्रयोग करने के लिए दण्ड।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 417 छल के लिए दण्ड।
  • भारतीय दण्ड  संहिता की धारा 465 धोखाधड़ी के लिए दण्ड।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 497 जारकर्म या व्यभिचार।
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 500  मानहानि।

2.असंज्ञेय अपराधों में कम सजा का प्रावधान है, अर्थात कुछ अपवादों के अलावा 3 साल से कम कारावास का प्रावधान है।

3.असंज्ञेय अपराधों के मामलों पुलिस अपराधी / अभियुक्त को बिना वारण्ट के  गिरफ्तार नहीं कर सकती है।

4.असंज्ञेय अपराधों के मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जाँच नहीं कर सकते है।

5.असंज्ञेय अपराधों में मामलों में अपराध की कार्यवाही शिकायत से ही शुरू होती है।

प्रमुख संज्ञेय अपराध

  • देशद्रोह
  • घातक आयुधों (हथियारों) से लैस होकर अपराध करना,
  • लोकसेवक द्वारा रिश्वत मामला,
  • बलात्कार,
  • हत्या,
  • लोकसेवक नहीं होने पर गलत तरीके से स्वयं को लोकसेवक दर्शाकर विधि विरुद्ध कार्य करना। जनता को ऐसा आभास हो कि संबंधित व्यक्ति लोकसेवक है।
  • विधि विरुद्ध जमाव। योजना बनाकर गैर कानूनी कार्य करना। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
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