दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : प्रारम्भिकी (धारा 1-5) - 06

क्रमशः .....

  • धारा 2 (d) के अनुसार – परिवाद (Complaint) से अभिप्राय इस  संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही किये जाने की दृष्टि से लिखित या मौखिक रूप में किसी मजिस्ट्रेट से किया गया वह कथन है कि किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया है, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात लेकिन इसके अन्तर्गत पुलिस रिपोर्ट सम्मिलित नहीं है परिवाद किसी न्यायिक कार्यवाही (Judicial Proceeding) का प्रथम चरण है। परिवाद प्रस्तुत होने पर न्यायिक कार्यवाही का प्रारम्भ होता है।
  • परिवाद लाने के लिए सक्षम केवल वही व्यक्ति नहीं होगा जिसके विरुध्द अपराध की घटना हुई है अपितु प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध की घटना का साझीदार है, अपराध के घटित होने की इत्तिला मजिस्ट्रेट (दंडाधिकारी) को दे सकता है। परिवाद अकेले व्यक्ति द्वारा अथवा एक से अधिक व्यक्ति द्वारा दायर किया जा सकता है। जब परिवाद एक से अधिक व्यक्ति द्वारा दायर किया जाता है, तो परिवादकर्ताओं जो संयुक्त परिवादी कहा जाएगा।
  • यद्यपि परिवाद के अन्तर्गत पुलिस रिपोर्ट को सम्मिलित नहीं किया गया है। परंतु स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसे किसी मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा की गयी रिपोर्ट परिवाद समझी जायेगी। जहां अन्वेषण के पश्चात् किसी असंज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट होता है तो ऐसी स्थिति में उस पुलिस अधिकारी को ‘परिवादी’ समझा जायेगा जिसके द्वारा रिपोर्ट की गयी है।

आगे अभी और है.. 

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