- जांच तथा अन्वेषण में अंतर – जांच तथा अन्वेषण में निम्नलिखित प्रमुख अंतर है –
- जांच का कार्य मजिस्ट्रेट अथवा न्यायालय द्वारा किया जाता है जबकि अन्वेषण का कार्य पुलिस अथवा मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है। जबकि अन्वेषण का कार्य पुलिस अथवा मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
- जांच का उद्देश्य ऐसे किसी प्रश्न का निर्धारण करना है जो कि मामले के अभिकथित अपराध के सम्बंध में दोषिता तथा अथवा निर्दोषिता के निर्धारण से सम्बन्धित है। इसके विपरीत अन्वेषण का उद्देश्य जांच एवं अन्वेषण के प्रयोजनार्थ साक्ष्य संग्रहण करना होता है।
- जांच में परीक्षाणाधीन व्यक्तियों की जांच की अवस्था में शपथ दिलायी जा सकती है जबकि अन्वेषण की अवस्था में परीक्षणाधीन व्यक्ति की शपथ पर प्रतिज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।
परिभाषाओं पे एक नज़र फिर से-
जांच (enquiry) - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(g) के अनुसार जांच से अभिप्रेत है -विचरण से भिन्न ऐसी प्रत्येक जांच जो इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा की जाएं।
जांच में विचारण सम्मिलित नहीं है।
आरोप विरचित करने के पूर्व मजिस्ट्रेट के समक्ष कि वे सभी कार्यवाहियां, जिनके परिणाम स्वरुप दोषसिद्धि नहीं होती, जांच कही जा सकती है।
जांच का मुख्य उद्देश्य सत्यता का निर्धारण करना है।
अन्वेषण( investigation) - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(h) के अनुसार अन्वेषण के अंतर्गत के सब कार्यवाहियां आती हैं जो इस संहिता के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा या मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी भी ऐसे व्यक्ति द्वारा जो मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, साक्ष्य एकत्रित करने के लिए की जाए।
अन्वेषण से अभिप्रेत है सामग्री तथा तथ्य के लिए खोज, जिसमें कि पता चल सके कि कोई अपराध किया गया है या नहीं। अन्वेषण का उद्देश्य साक्ष्य को एकत्रित करना होता है।