मनुष्य का हृदय हाथ के मुट्ठी के आकार का शंक्वाकार एक पेशीय अंग है, यह फेफड़ों के मध्य थोड़ी बांयी ओर स्थित होता है। और दिल एक बार धड़कना शुरू कर देता है, तो मरते दम तक लगातार धड़कता रहता है। यह बहुत कोमल अंग है।
इसके आंतरिक भाग के अंतर्गत निलय, अलिंद, शिराएं, धमनियां, वाल्व, आदि महत्वपूर्ण अंग आते हैं।
मनुष्य का हृदय 4 कोष्ठकों में विभाजित होता है, जिसमें ऊपर- दाएं ओर "दायां अलिंद" तथा बाएं ओर बायां अलिंद ठीक इसी प्रकार नीचे- दाएं ओर दायां निलय तथा बाएं ओर बायां निलय होता।
निलय और अलिंद के मध्य में दाहिने तरफ ट्राई कस्पिड वाल्व तथा बाएं तरफ बाइकस्पिड वाल्व लगा होता है।
अतः जब अलिंद सिकुड़ता है तो निलय फैलता है और निलय के सिकुड़ने पर अलिंद फैलता है। सिकुड़ने और फैलने की क्रिया को क्रमशः प्रकुंचन और अनुशिथिलन कहा जाता है। वाल्वों के ऊपर अलिंद तथा निलय के मध्य दोनों ओर अर्ध्रचन्द्राकार कपाट लगे होते हैं, जो वाल्वों के माध्यम से खुलते और बन्द होते रहते हैं। जिससे रुधिर के आवागमन में प्रतिरोध उत्पन्न नहीं होता है।
शिराओं के माध्यम से रुधिर समस्त शरीर से हृदय की ओर आता है और धमनियों द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में पुनः पम्प कर दिया जाता है। इस पम्पिंग क्रिया में आलिंद और निलय की अहम भूमिका होती है।
हृदय में पल्मोनरी धमनी पाई जाती है, जिसके बंद हो जाने से हृदयाघात होता है अतः मनुष्य के शरीर में पोषक तत्व व ऑक्सीजन जो रुधिर के माध्यम से संपूर्ण शरीर पहुंचाया जाता है। इस धमनी के बंद हो जाने से यह क्रिया संपन्न नहीं हो पाती है। और ऑक्सीजन व पोषक तत्व के अभाव में मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।
महत्वपूर्ण बिंदु-
स्वास्थ्य मनुष्य का हृदय 1 मिनट में 72 से 75 बार धड़कता है।
रुधिर दाब रक्तचाप- एक स्वस्थ व्यक्ति का रुधिर दाब 120/80mmhg होता है ।
रुधिर दाब को मापने के लिए स्फेगमोमैनोमीटर का प्रयोग किया जाता है।
हृदय की ध्वनि स्टैथोस्कोप की सहायता से सुनी जाती है।
मनुष्य के रुधिर का pH मान 7.4 होता है।