बाघ संरक्षण पर तीसरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन

वर्ष 2012 में दूसरा समीक्षा सम्मेलन हुआ था, वर्ष 2012 के बाद बाघ संरक्षण पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन का आयोजन जनवरी 2019 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय , अंतर सरकारी संगठन 'ग्लोबल टाइगर फोरम' के सहयोग से किया गया तीसरे समीक्षा सम्मेलन में बाघ रेंज के 13 देशों द्वारा वैश्विक बाघ पुनः प्राप्ति कार्यक्रम जो कि बाघों की शीर्ष पांच उपजाति को बचाने से संबंधित है के लिए इस आयोजन को किया गया इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीव तस्करी को नियंत्रण तथा उनकी स्थिति में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा करना था। बाघ रेंज के 13 देशों ने  वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में घोषणा के दौरान वर्ष 2022 तक अपनी अपनी सीमा में बाघों की संख्या दोगुनी करने का संकल्प लिया था । उस समय भारत में 1411 बाघ होने का अनुमान लगाया गया था वर्ष 2014 के अनुसार भागो की संख्या 2226 हो गई है राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 4 वर्ष बाद आधुनिक तरीकों से बाघों की गिनती की जाती है वर्तमान में बाघ अनुमान का चौथा चक्र जारी है जिसकी रिपोर्ट जल्द ही सामने आएगी वर्ष 2013 में संपूर्ण एशिया के लिए प्रथम बाघ संरक्षण सर्वेक्षण (CATS)  प्रारंभ हुआ इसकी वर्ष 2018 के रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में से कई क्षेत्रों में प्रभावी प्रबंधन के लिए बुनियादी योजनाओं का अभाव है मलेशिया में बाघों की संख्या में राष्ट्रीय अनुमान के अनुसार कमी दर्ज की गई है

ग्लोबल टाइगर फोरम के अनुसार बाघों की मेजबानी करने में भारत की मौजूदा क्षमता 2500 से 3000 बाघों तक सीमित है भारत सरकार ने वर्ष 1973 में राष्ट्रीय पशु बाघ को संरक्षित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर को लॉन्च किया जो कि पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक शपथ केंद्र आधारित योजना है जो की राज्यों को बाघ संरक्षण के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान करती है

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में संशोधन किया गया ताकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और बाघ एवं अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए अपराध नियंत्रण ब्यूरो वन्यजीव का गठन किया गया चीन तथा नेपाल के साथ भारत के बाघ संरक्षण से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किया गया बांग्लादेश के साथ सुंदरवन के रॉयल बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए हस्ताक्षर किया गया भारत में बाघ या चीता संरक्षण के संबंध में रूस के साथ सहयोग के लिए भी एक उप समूह बनाया गया है ।

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