अभ्रक आग्नेय एवं रूपांतरित चट्टानों में सफेद या काली छोटी छोटी बारीक परतों के रूप में पाया जाता है। अभ्रक परतदार पारदर्शी हल्का एवं चमकदार होता है इसे उचित आप पर ही गलाया जा सकता है इसी कारण इसका उपयोग बहुत से उद्योगों में किया जाताा है। वर्तमान समय में इसका उपयोग बिजली के सामानों में किया जाताा है, क्योंकि यह ताप एवं विद्युत का कुचालक होता है। इसका उपयोग छोटे-छोटे डायनेमो, बिजली की मोटर, बेतार के तार, मोटर, हवाई जहाज, तार एवं टेलीफोन, रेडियो, स्टोव , साज श्रृंगार की सामग्री, कपड़ों, पंखा, खिलौना, मिट्टी के बर्तनों पर चमक देने आदि कार्यों में किया जाताा है।
अभ्रक अपनी स्वच्छता तथा पतली परत के कारण लालटेन की चिमनी, नेत्र रक्षक चश्मा, धमन भट्टीयों को पोतने, मकानों की खिड़कियों, सजावट के कागज तथा खपरैल आदि में काम आता है। इसका उपयोग अग्नि प्रतिरोधक के रूप मेंं भी किया जाता है। सैनिक साज सामान में भी प्रयोग किया जाता है इस प्रकार अभ्रक बहुमुखीीी अधातु खनिज है। जिसका उद्योगिक महत्व बहुत अधिक है।
उत्पादन एवं वितरण
अभ्रक के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। विश्व उत्पादन का 85 से 90% उत्तम अभ्रक भारत से प्रााप्त होता है। यह अभ्रक उत्तम श्रेणी का होता है । देश के अभ्रक उत्पादन में बिहार आंध्र प्रदेश राजस्थान केरल कर्नाटक आदि राज्य प्रमुख है ।