बीसवीं सदी के अंतिम दशक में नवीन लोक प्रबंधन एवं सुशासन की अवधारणा का विकास साथ- साथ हुआ। अतः यह कहना अत्यंत कठिन है कि क्या नवीन लोक प्रबंधन अच्छे प्रशासन की उत्पत्ति का कारण है या अच्छे शासन की अवधारणा ने नवीन लोक प्रबंधन को जन्म दिया है। लेकिन व्यवहारिक रूप में देखा जाए तो दोनों एक दूसरे से संबंधित हैं। नवीन लोक प्रबंधन प्रबंधन पर बल देता है न की नीति पर। इसके अतिरिक्त 3Es इसके मौलिक तत्व है। इसके तहत लोक नौकरशाही ऐसे अभिकरण में रूपांतरण है जहां की नागरिक एवं प्रशासन के मध्य आपसी संबंध उपभोक्ता एवं व्यापारी का होगा। इसके तहत अर्ध बाजार, अनुबंध आधारित नियुक्ति की व्यवस्था को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह प्रबंधन का वह ढंग है जिसमें प्रबंध की कीमत में कटौती कर, सार्वजनिक व्यय को कम कर उत्पादन बढ़ाने पर बल दिया जाता है। आर्थिक प्रोत्साहन के द्वारा निष्पादन को बढ़ावा देना तथा प्रबंधकों के शक्ति करण पर बल दिया जाता है। अच्छा अभिशासन नवीन लोक प्रबंधन हेतु एक महत्वपूर्ण विनिवेशि तत्व माना गया।
जान एरिक का मानना है कि आज प्रशासन स्पष्ट रूप से नियमोंनमुखी के स्थान पर परिणामोन्मुुुखि , आज्ञापालन का पुरस्कार, निष्क्रियता पर कार्यवाही, केंद्रीयकरण के स्थान पर विकेंद्रीकरण, नागरिक कर्तव्य के स्थान पर नागरिक अधिकार इत्यादि। अभिशासन की अवधारणा निश्चय ही सरकार को मानवमुखी, जनहितकारी, विकासात्मक एवं सहयोगी बनाने हेतु मार्ग प्रशस्त करता है। परंतु यदि विश्लेषण किया जाए तो लेफ्ट व्हिच ने अभिशासन की अवधारणा संबंधित शर्तों पर बल देते हुए टिप्पणी किया कि पश्चिमी सहायता एवं विकास नीति की विशेषताएं हैं -
*सहायता का उद्देश्य खुला बाजार एवं प्रतियोगिता अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना।
*प्रजातंत्रकीकरण की शर्त।
*मानव अधिकार की सुरक्षा।
परन्तु यदि सूक्ष्मतम विश्लेषण किया जाए तो वे इन शर्तो के माध्यम से ऋण देने से पूर्व आश्वस्त होना चाहते थे कि उनका धन सुरक्षित है कि नहीं, न कि उनका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों की स्थिति को सुधारना था।