15 अगस्त 1995 को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में प्रारंभिक शिक्षा के लिए कुछ इलाकों में राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसे मध्यान्ह भोजन योजना के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2008 से इसका विस्तार पूरे देश भर में कर दिया गया। इस योजना को प्रारंभ करने का औचित्य इस प्रकार है-
* समाज के लोग वंचित वर्गों के अधिकतर बच्चे खाली पेट स्कूल पहुंचते हैं। अतः अध्ययन में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। शिक्षण कक्ष की भूख को दूर करने के लिए मध्य में भोजन उन बच्चों की सहायता करता है।
यह योजना अधिक बच्चों को नामांकित करने के साथ-साथ दैनिक आधार पर छात्रों की नियमित उपस्थित के संदर्भ में स्कूल सहभागिता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।
* यह योजना बच्चों के अनुपूरक पोषण के एक नियमित स्रोत का कार्य भी कर सकती है। और उनके स्वास्थ्य के विकास को सुगम बनाती है।
* एक सुव्यवस्थित मध्यान भोजन का उपयोग बच्चों को विभिन्न अच्छी आदतें सिखाने और स्वच्छता अपनाने के महत्व के बारे में सिखाती हैं।
* मध्यान भोजन समतावादी मूल्यों का प्रसार करने में भी सहायता प्रदान करता है क्योंकि विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चे इकट्ठे बैठकर भोजन करते हैं।
* यह योजना विद्यालय प्रतिभागीता में महिला पुरुष अंतराल को कम कर रहा है। यह उन बाधाओं को समाप्त करने में सहायता प्रदान करती है। जो बालिकाओं को स्कूल जाने से रोकती है। यह योजना महिलाओं को रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से भी उपयोगी है।