भारत में सुपर कंप्यूटर एवं निर्मित संस्थान का संक्षिप्त विवरण-

कंप्यूटर का जनक चार्ल्स बैबेज को कहा जाता है। अगर हम भारत में सुपर कंप्यूटर की बात करें तो यह अमेरिका द्वारा भारत को सुपर कंप्यूटर देने से मना कर देने पर भारत मे सुपर कंप्यूटर का निर्माण 1980 के दशक में शुरू हुआ।

दरअसल 1987 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को सुपर कंप्यूटर (क्रे-एक्स) देने से मना कर दिया। भारत के लिए यह चिंता जनक स्थिति थी, तब भारत में कई संस्थाओं जैसे- BARC, DRDO, National Aerospace Lab (NAL), C- DOT( Centre for Development of Telematics) and
C- DAC (CENTRE FOR DEVELOPMENT OF ADVANCED  COMPUTING) ने सुपर कंप्यूटरों के विकास में प्रमुख कार्य किया।
C- DAC ने ही भारत का पहला सुपर कंप्यूटर 1990 में बनाया था जिसे परम 8000 नाम दिया गया।

C- DAC (Centre for Development of Advanced Computing) -
पुणे में वर्ष 1988 में सी-डैक की स्थापना सुपर कंप्यूटर की निर्माण हेतु की गई थी।
सी- डैक इलेक्ट्रॉनिक तथा सूचना तकनीकी मंत्रालय (Meit Y) के अंतर्गत आने वाला मुख्य अनुसंधान तथा विकास (R & D) यह सूचना तकनीक इलेक्ट्रॉनिक तथा इन से जुड़े क्षेत्रों में अनुसंधान तथा विकास कार्य करता है। जब से C- DAC की स्थापना हुई तब से अब तक इस संस्थान द्वारा परम नाम से कंप्यूटरों की एक श्रृंखला बनती चली गई।

जो इस प्रकार से है- 1990 में "PARAM 8000, 1998 में PARAM 10000, 2002 में PARAM Padma, 2008 में PARAM Yuva, 2013 में PARAM Yuva 2, 2014 में PARAM Bio- Blaze and 2016 में PARAM ISHAN"

पुणे के अतिरिक्त बंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई समय भारत के कई शहरों में इसकी शाखाएं हैं।

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