विलसेट ऑस्ट्रम के द्वारा इस विचारधारा का प्रतिपादन किया गया। उनका मानना था कि नौकरशाही अत्यधिक कार्यभार से ग्रसित है क्योंकि विकासशील समाजों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक प्रगति के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को तेज करना था। अतः यह सरकार के लिए लक्ष्य था, जबकि प्रशासन इस लक्ष्य को प्राप्त करने का साधन था। इस कारण सरकार की निर्भरता नौकरशाही पर दिखाई देने लगी। जिस कारण नौकरशाही के स्वनिर्णय की शक्ति में वृद्धि हुई। परिणाम स्वरूप प्रशासक निरंकुश होकर जनता के हितों की उपेक्षाएं करने लगा।
ऑस्ट्रम का मानना है कि राजनीतिज्ञों का मुख्य उद्देश्य चुनाव जीतना है। जनता के हितों कि उनके द्वारा भी उपेक्षा की जाती रही हैं। क्योंकि एक बार चुनाव जीतने के बाद वे जनता से तब तक के लिए अलग हो जाते हैं जब तक कि उन्हें पुनः चुनाव का सामना ना करना पड़े। चुनाव के समय राजनीतिज्ञों के द्वारा जनता से अनेक प्रकार के वायदे किए जाते हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे वायदे कभी पूरे नहीं होते। इस प्रकार आम जनता के हितों की उपेक्षा के लिए जितना जिम्मेदार प्रशासन को मानते हैं उतना ही जिम्मेदार वह राजनीति को। इस कारण ऑस्ट्रम के द्वारा विकासशील समाजों के नौकरशाही प्रतिमान के विकल्प के रूप में लोक चयन स्कूल का प्रतिपादन किया गया।