लोक चयन स्कूल के अंतर्गत प्रशासन के अनेक केंद्रों की आवश्यकता है ताकि जनता को वस्तुएं एवं सेवाएं आसानी से सस्ते दर पर उपलब्ध हो सके। जनता के पास विभिन्न विकल्प उपलब्ध होंगे। इन उपलब्ध विकल्पों में से सर्वोत्तम विकल्प का चयन जनता करेगी। लोक चयन स्कूल के माध्यम से ऑस्ट्रम ने प्रशासन के निजी करण पर बल दिया ताकि वस्तु एवं सेवाओं के केंद्रों का विकेंद्रीकरण किया जा सके। इन विकल्पों के परिणाम स्वरुप विभिन्न संगठनों के मध्य प्रतिस्पर्धा होगी जिससे जनता को सस्ते दर पर गुणात्मक सेवाएं प्राप्त हो सके।
लोक चयन स्कूल की विचारधारा 3 मान्यताओं पर आधारित है।
*एक विवेकशील प्राणी अपने निर्णय के माध्यम से अधिकतम उपयोगिता को प्राप्त करने का प्रयास करता है जो कि उसके व्यक्तिगत स्वार्थ पर आधारित है।
*लोक चयन स्कूल विकेंद्रीकरण प्रजातांत्रिक प्रशासन संगठनात्मक प्रतिस्पर्धा की मान्यता को स्वीकार करता है। प्रत्येक व्यक्ति अच्छा तभी हो सकता है जब कि उसके द्वारा लोक सेवाओं को प्रस्तुत करने हेतु योगदान दिया जाए। इसके साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति परिस्थितियों में और भी अच्छा हो सकता है जबकि वह कुछ विशिष्ट सेवाओं में अपना न योगदान दें। जैसे -विदेश नीति, रक्षा सेवाएं, कानून एवं व्यवस्था इत्यादि। लोक चयन स्कूल मौलिक उद्देश्य दक्षता को अधिकतम करने से है जो कि श्रम समय एवं संसाधनों के अनुकूलतम प्रयोग पर आधारित है।