प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्रों पर पतली सकरी पट्टी के रूप में जो मैदान फैले हैं, उन्हें समुद्र तटीय मैदान कहते हैं। यह मैदान या तो सागरीय क्रियाओं के द्वारा अथवा नदियों के द्वारा लाई गई अवसाद से निर्मित हुई है। यह क्रमशः पश्चिमी तथा पूर्वी समुद्र तटीय मैदान कहलाते हैं।
1. पश्चिमी तटीय मैदान *
यह मैदान एक शकरी पट्टी के रूप में विस्तृत है प्रायद्वीप के पश्चिम में खंभात की खाड़ी से लेकर कुमारी अंतरीप तक इस मैदान का विस्तार है। इसकी औसत चौड़ाई 64 किलोमीटर है जबकि नर्मदा एवं ताप्ती नदियों के मुहानों के निकट यह 80 किलोमीटर तक चौड़े हैं। नदियों के मुहांनो पर बालू जम जाने से लैगूूून का निर्माण हुआ है । इसने मछलियां भी पकड़ी जाती हैं। इस मैदान के ऊपरी भाग को कोंकण, मध्यवर्ती भाग को कन्नड़ तथाा दक्षिणी भागो को मालाबार कहते हैं।
2.पूर्वी तटीय मैदान*
प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी किनारों पर बंगाल की खाड़ी तट एक तथा पूर्वी घाट के मध्य पश्चिम बंगाल से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक पूर्वी तटीय मैदानों का विस्तार है। यह मैदान पश्चिमी तटीय मैदानों से अधिक चौड़ा है , जिसकी औसत चौड़ाई 161 से 483 किलोमीटर है। यह स्वर्ण रेखा से कुमारी अंतरीप तक फैला हुआ है इस मैदान में महानदी गोदावरी कृष्णाा एवं कावेरी नदियों के डेल्टा विकसित हुए हैं।