प्रायद्वीपीय पठारी प्रदेश अथवा दक्कन का पठार

भारत के दक्षिण में प्राचीन ग्रेनाइट तथा बेसाल्ट की कठोर सैलो से बना दक्कन का पठार त्रिभुज आकार आकृति में फैला हुआ है जिसे दक्षिण का पठार कहते हैं। यह विशाल प्रायद्वीप पठार भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन भू भाग है। प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवाना लैंड का ही एक अंग है, जिसे अपरदन के अनेक कारकों ने काट छांट दिया है। यह पठारी प्रदेश 16लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। इसके उत्तर में गंगा सतलुज ब्रह्मपुत्र का मैदान, पूर्व में पूर्वी तटीय मैदान एवं बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर तथा पश्चिम में पश्चिमी तटीय मैदान एवं अरब सागर स्थित है। इस पठार पर अनेक पहाड़ियां विस्तृत है जो अपछय द्वारा प्रभावित हैं। समुद्र तल से इस पठार की औषध ऊंचाई 600 से 900 मीटर है।

इस पठारी प्रदेश का विस्तार उत्तर में राजस्थान से लेकर दक्षिण में कुमारी अंतरीप तक 1700 मीटर लंबाई तथा पश्चिम में गुजरात राज्य से लेकर पूर्व में बंगाल राज्य तक 1400 किलोमीटर चौड़ाई में है। प्राकृतिक दृष्टिकोण से इस की उत्तरी सीमा अरावली, कैमूर तथा राजमहल की पहाड़ियां द्वारा निर्धारित होती हैं। नर्मदा नदी की घाटी संपूर्ण प्रायद्वीपीय पठार ई क्षेत्र को दो आज समान भागों में विभाजित कर देती हैं। उत्तर की ओर के भाग को मालवा का पठार तथा दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार के नाम से पुकारते हैं ।

Posted on by