भारतीय संविधान Easy Notes - 28 (भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं)

क्रमशः..

Day - 28

संविधान की विशेषताएं

  • प्रत्येक देश का संविधान उस देश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा वहाँ की सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाता है, चूंकि सभी देशों का इतिहास और सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक परिस्थितियाँ एक-सी नही होती है इसलिए प्रत्येक देश के संविधान के उपबन्धों में कुछ विशेष लक्षण पाये जाते हैं।
  • भारतीय संविधान में भी बहुत सी विशेषताएं ऐसी हैं जो अन्य देशों के संविधान से भिन्न हैं। भारतीय संविधान के निम्नलिखित प्रमुख विशेषतायें हैं –
    1. निर्मित, लिखित एवं सर्वाधिक व्यापक संविधान
    2. प्रभुत्वसम्पन्न, लोकतंत्रात्मक, पंथनिरपेक्ष एवं समाजवादी संविधान
    3. स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना
    4. संसदीय पध्दति की सरकार की स्थापना
    5. विधि के शासन की स्थापना
    6. मूल अधिकारों का समावेश
    7. राज्य की नीति के निर्देशक तत्व का समावेश
    8. नम्य एवं अनम्य संविधान
    9. केन्द्राभिमुख संविधान
    10. वयस्क मताधिकार की व्यवस्था
    11. एकल नागरिकता का प्रावधान
    12. मूल कर्तव्यों का विवरण
    13. कई विदेशी संविधानों के तत्वों का समावेश
    14. शक्ति पृथक्करण का सिध्दान्त
    15. अल्पसंख्याकों के लिए विशेष प्रावधान
  • भारत के संविधान का निर्माण विशेष समय पर विशेष संविधान सभा द्वारा किया गया है और इसे पूर्ण रूप से लिखा गया है। इस संविधान में लिखित रूप में प्रशासन तथा सांविधानिक अधिकारियों के कार्यो का वर्णन, न्यायालयों के गठन तथा उनकी अधिकारिता, केन्द्र-राज्य सम्बन्ध, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के संरक्षण, मूलाधिकार तथा उनके संरक्षण एवं राज्य की नीति के निदेशक तत्वों के सम्बन्ध में व्यापक रूप से लिखित व्यवस्था की गयी है। जिस समय भारत का संविधान लागू किया गया था, उस समय इसमें 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां थीं, जबकि सन्युक्त राज्य अमरीका के संविधान में केवल 7, कनाडा के संविधान में 147, दक्षिण अफ्रिका के संविधान में 253 तथा आस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद ही हैं। भारत के संविधान की व्यपकता में दिन प्रतिदिन वृध्दि होती जा रही है।

मिलते है हम अगले दिन, इसी विषय पर फिर  चर्चा करने के लिये..

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