लोक उपक्रम

 उपक्रम का अभिप्राय सरकार की किसी भी गतिविधि से हो, परंतु इस संदर्भ में उपक्रम से अभिप्राय सरकार के व्यवसायिक एवं वाणिज्य कार्यों के संचालन से है, अर्थात सरकार अपनी व्यवसायिक एवं वाणिज्य कार्यों के संचालन के लिए उपक्रम का गठन करती है जो कि लोक प्रशासन की विशेषता के रूप में लोक उत्तरदायित्व एवं जन नियंत्रण तथा निजी प्रशासन की विशेषता के रूप में सहायता एवं लचीलापन देखने को मिलता है। यहां लोक से आशय लोक स्वामित्व, लोक उद्देश्य, लोक प्रबंधन, लोक नियंत्रण से है। लोक उपक्रम के गठन के औचित्य के बारे में बात करें तो-

यह आर्थिक विकास की गति को तीव्रता प्रदान करता है तथा नियोजित अर्थव्यवस्था के राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का निर्वहन कर करता है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग किया जा सके।

सरकार के द्वारा आर्थिक एवं सामाजिक जनकल्याण को सुनिश्चित करने हेतु संसाधनों का एकत्रीकरण किया जाता है।

क्षेत्रीय असमानता एवं इससे उत्पन्न विसंगति को दूर करता है, रोजगार के अवसर को सुनिश्चित करता है।

समाजवादी समाज के ढांचे को स्थापित करना ताकि भौतिक संसाधनों के स्वामित्व एवं नियंत्रण के एकाधिकार को रोका जा सके।

भारत में लोक उपक्रम के तीन प्रकार हैं- विभागीय उपक्रम, लोक निगम ,सरकारी कंपनी।

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