मानव विकास सूचकांक संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी एक सूचकांक है। जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा एवं प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय के आधार पर देशों के मानव विकास के स्तर का आकलन करता है। एक स्वस्थ दीर्घ एवं रचनात्मक जीवन के दर्शन के साथ जारी सूचकांक के वर्ष 2018 के संस्करण में भारत 0.640 मूल्य के साथ मध्यम मानव विकास वाला देश रहा, जिसमें भारत की रैंक 130 वी रही। यदि भारत की निम्न स्थिति के मूल में जाएं तो असमान विकास स्वास्थ्य सुविधाओं तथा शिक्षा तक आम पहुंच की सीमाएं लैंगिक भेदभाव, निम्न प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय आदि भारत की मौजूदा स्थिति के प्रमुख कारण हैं। भारत के मानव विकास सूचकांक में सुधार हेतु बहुआयामी सुधारों को अपनाया जाना चाहिए।
भारत में असमान विकास का समाधान है समावेशी विकास और समावेशी विकास हेतु सर्व प्रमुख तत्व है- जागरूकता और कौशल उन्नयन। यह दोनों तत्व एक तो मानव संसाधन का विकास करेंगे और दूसरे उन्हें उद्यम स्थापित करने हेतु प्रेरित भी करेंगे। इससे रोजगार एवं आय दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
लैंगिक विभेद भी मानव विकास के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान हेतु पुरुष नेतृत्व में महिला विकास के मॉडल के स्थान पर महिला नेतृत्व में महिला विकास के मॉडल को अपनाया जाना चाहिए। इससे दक्ष एवं व्यावहारिक नीति निर्माण में सहायता मिलेगी।
भारत में अभी भी स्कूल अवध के अनुमानित वर्ष कम है जो यह दर्शाता है कि अभी भी भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित है। भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या उनके क्षेत्रीय पहुंच तथा उनमें प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता तीनों को सुधारने हेतु प्रयास किया जाना चाहिए।