योजना आयोग का गठन वर्ष 1950 में एक मंत्रिमंडलीय संकल्प द्वारा किया गया था। योजना आयोग को और व्यवहारिक दक्ष तथा आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने हेतु 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडलीय प्रस्ताव द्वारा इसे नीति आयोग से प्रतिस्थापित कर दिया गया। यद्यपि योजना आयोग एवं नीति आयोग दोनों सलाहकारी संस्थाएं हैं, जो बेहतर नियोजन आवश्यकता हेतु सलाह देने का दायित्व निभाती रही हैं, तथापि योजना आयोग एवं नीति आयोग अनेक आधारों पर एक दूसरे से भिन्नता रखते हैं। उनके भिन्नता के तत्व बिंदुवार निम्नवत हैं-
जहां योजना आयोग राज्य प्रेरित अर्थव्यवस्था से संबंधित था, वही नीति आयोग को बाजार प्रेरित अर्थ व्यवस्था के अनुरूप गठित किया गया है। योजना आयोग, योजना निर्माण हेतु ऊपर से नीचे की ओर के दृष्टिकोण पर कार्यरत था। जबकि नीति आयोग में नीचे से ऊपर की ओर के दृष्टिकोण को अपनाया गया है।
योजना आयोग मूलतः केंद्र सरकार की एक संस्था थी। जिसमें राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं था। इसके विपरीत नीति आयोग सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर आधारित है जिसमें केंद्र एवं राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व है। राज्यों के प्रतिनिधित्व के कारण यह राष्ट्रीय विकास परिषद के कार्यों का संपादन करने में भी समर्थ है।
नीति आयोग में विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों के संदर्भ में क्षेत्रीय परिषद, जिसमें संबंधित राज्य संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री/ उप राज्यपाल सदस्य होंगे के गठन का भी प्रावधान है जो इसे संघवाद की दृष्टि से और भी विशिष्ट बनाता है।