नवीन राज्यों का उदय और अंग्रेजों का विस्तार । भाग - 2

           शुजाउद्दीन (1727-1739 )ई.


यह बहुत ही योग्य शासकों में नहीं था । इसके काल में सत्ता की सारी शक्तियां कुछ महत्वपूर्ण लोगों के हाथों में थी जैसे आलम चंद, फतेह चंद, जगतसेउ, अलीवर्दी खां जिसमें से अलीवर्दी खां को इसने बिहार का नायब सूबेदार नियुक्त किया । 1739 में सुजाउद्दीन की मृत्यु हो गई ।

    सरफराज खां (1739-40)ई.


इसके शासनकाल में बिहार के नायब सूबेदार अलीवर्दी खां ने षड्यंत्र कर गिरिया के युद्ध में सरफराज खां की हत्या किया और स्वयं शासक बना ।

       अलीवर्दी खां ( 1740-1756)ई.


गद्दी पर बैठते ही इसने मुगल शासक मुहम्मद शाह को 2 करोड़ घूस देकर स्वतंत्र शासक की अधिकारिता प्राप्त कर ली लेकिन पूरे शासनकाल 1740-56 ई. के बीच एक भी रुपया राजकोष में नहीं दिया । अंग्रेजों के बारे में उसका कहना था "यदि इनके साथ प्रेम से रहा जाए तो शहद देंगे और यदि छेड़ा गया तो मधुमक्खी की तरह काट खाएंगे"
    1751 में इसे मराठा सरदार शाहजी भोंसले के आक्रमण का सामना करना पड़ा और संधि करनी पड़ी जिसके तहत उड़ीसा प्रांत और 1200000 रुपए वार्षिक चौथ कर के रूप में देना स्वीकार करना पड़ा । इसका कोई पुत्र नहीं था इसकी तीन पुत्रियां थी। जिसमें से एक का विवाह ( बड़ी बेटी से छोटी बेटी के क्रम में विवाह ) ढाका के नवाब के साथ, दूसरी का विवाह पूर्णिया के नवाब के साथ, तीसरे का विवाह पटना के नवाब के साथ हुआ । भाग्य इतना खराब था कि इसके तीनों दामादों की मृत्यु हो गई ।जिससे कि इसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था । अंततः अपनी छोटी पुत्री के पुत्र सिराजुद्दौला को इसने उत्तराधिकारी बनाया । 1756 में अलीवर्दी खां की मृत्यु हो गई ।
                लेख अभी जारी है। अगले भाग में हम सिराजुद्दौला के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे

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