भारतीय दण्ड संहिता : अपराध का अर्थ एवं परिभाषा - 05

क्रमशः  ...

  • यद्पि भारतीय दण्ड संहिता में क्षेत्राधिकार को लेकर किसी व्यक्ति के पक्ष में कोई अपवाद नहीं है परन्तु कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं जिन्हें भारतीय संविधान के उपबन्धों के अधीन या विश्व के सभ्य राष्ट्रों की विधियों के अधीन अन्मुक्ति प्राप्त है। दूसरे शब्दों में, निम्नलिखित व्यक्तियों को भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों से उन्मुक्ति प्राप्त है –
    1. विदेशी राष्ट्राध्यक्ष
    2. राज्य के उच्चाधिकारी, जैसे – राष्ट्रपति व राज्यों के राज्यपाल
    3. राजदूत और राजनयिक अभिकर्ता
    4. विदेशी शत्रु
    5. विदेशी सेना
    6. युध्दपोत, आदि
  • कोई व्यक्ति भारतीय देशी न्यायालयों द्वारा केवल तभी विचारणीय होता है जब अपराध भारत के अन्दर किया हो और भारत के बाहर घटित होता है तो वह तभी भारत में दण्डनीय होगा जब संहिता के विशिष्ट धाराओं 3, 4 तथा 108-क आदि के उपबन्धों से प्रभावित हो।
  • 30 सितम्बर, 1967 की भारत सरकार की उद्घोषणा के अनुसार भार्त की जल सीमा में उचित आधार रेखा (Proper base line) 12 नॉटिकल मील तक फैली हूई है। अतः राज्य की विधियाँ समुद्र के इसी भाग पर लागू होगी।
  • भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी भी वायुयान में यदि कोई अपराध घटित होता है तोप वायुयान चाहे जहाँ भी हो भारत में उसका विचारण हो सकता है।
  • विदेशियों द्वारा भारतीय सीमा के अन्दर किया गया अपराध भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत अपराध नहीं माना जाता है।

आगे अभी और है ... 

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