भारतीय दण्ड संहिता : अपराध का अर्थ एवं परिभाषा - 07

क्रमशः  ...

  • एक कृत्य अन्तर्गत अवैध लोप (illegal omission) भी शामिल है। यदि विधि द्वारा किसी व्यक्ति पर कोई दायित्व सौंपा गया है और वह उस दायित्व का निर्वहन नही करता है  तो इस लोप या उपेक्षा के लिए उसे दण्डित किया जाएगा।

            उदाहरण 1 – यदि ‘अ’ अपनी पत्नी तथा बच्चों को भूख से मरने देता है तो व हत्या का अपराध करता है क्योंकि पत्नी तथा बच्चों के भरण पोषण के              लिए वह विधि के अधीन उत्तरदायी है।

           उदाहरण 2 – यदि नदी में तैरते हुए ‘अ’ किसी कठिनाई का अनुभव करता है तथा बहुत लोग जिनमें से कुछ अच्छे तैराक भी है, नदी के किनारे                 खड़े होकर ‘अ’ को नदी में डुबते हुए देखते है परन्तु वे लोग उसे बचाने का कोई प्रयत्न नहीं करते हैं। यहाँ किसी की भी निष्क्रियता को ‘अ’ की मृत्यु             का कारण नहीं कहा जा सकता।

           उदाहरण 3 – यदि ‘अ’, ‘ब’ को नदी में ढकेल देता है और ‘ब’ की डूबने से मृत्यु हो जाती है तो समस्या अलग किस्म की होगी। यहाँ ‘अ’ का कार्य              ‘ब’ की मृत्यु का आधार है। अतः ‘अ’ दोषी है।

          उदाहरण 2 में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसे ‘अ’ की मृत्यु के लिए दोषी ठहराया जा सकें। परन्तु बाद वाले प्रकरण में ‘अ’ वह व्यक्ति है जिसे दोषी ठहराया जायेगा। यदि हम सही उदाहरणों की तुलना करें अर्थात् प्रथम उदाहरण में छोटे बच्चों की मृत्यु, भूख से द्वितीय उदाहरण में ‘अ’ की मृत्यु स्वेच्छा से तैरते हुए तथा उदाहरण तृतीय में साशयपूर्वक अपराध कारित किया गया है। पहला निष्क्रियता का, दूसरा निन्दा के पात्र का, व तीसरा अवैध लोप का मामला है। एक दर्शक जो किसी तैराक की कठिनाई में सहायता करने से इन्कार करता है तो वह नैतिक निन्दा का पात्र तो हो सकता है किन्तु वह कोई दाण्डिक अपराध नहीं करता।

आगे अभी और है ... 

Posted on by