रक्त एक तरफ संयोजी ऊतक है , जो गाढ़ा , चिपचिपा , जल से भारी , अपारदर्शी झारीय द्रव है जिसका पीएच मान 7.4 होता है ।
शरीर भार का 7-8 % या 5-6 लीटर रक्त स्वस्थ मानव शरीर में उपस्थित होता है । रक्त शरीर में विभिन्न पदार्थों जैसे ऑक्सीजन , कार्बनडाइऑक्साइड, भोज्यपदार्थ , उत्सर्जित पदार्थ एवं अन्य पदार्थों का परिवहन करता है तथा रक्त का निर्माण सामान्यता अस्थि के मजा गुहा में स्थित मज्जा कोशिकाओं द्वारा होता है ।
यह मज्जा कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं -
- लाल अस्थि मज्जा
- पीत अस्थि मज्जा
लाल अस्थिमज्जा कोशिकाएं मज्जा गुहा में ऊपर और नीचे स्थित होती हैं जबकि पीत अस्थि मज्जा बीच में स्थित होता है ।
भ्रूण अवस्था में रक्त का निर्माण यकृत तथा प्लीहा में होता है ।
रक्त मुख्यतः चार भागों से मिलकर बना होता है।
- लाल रक्त कणिकाएं
- श्वेत रक्त कणिकाएं
- प्लेटलेट्स
- प्लाज्मा
लाल रक्त कणिकाएं
लाल रक्त कणिकाओं के कोशिकाओं की संख्या रक्त कोशिका में सर्वाधिक होती है इनकी कोशिकाओं की निश्चित आकार व आकृति होती है जो उभया अवतल प्रकार की होती है लेकिन परिपक्व लाल रक्त कणिका में केंद्रक तथा अन्य कोशिकांग अनुपस्थित होता है शुरुआत में यह कोशिकांग उपस्थित रहता है बाद में वर्णक में बदल जाता है।
ऊंट एवं लामा इसके अपवाद हैं (लामा दक्षिण अमेरिकी जंतु है )
आर बी सी का रंग लाल, हीमोग्लोबिन के कारण है हिमोग्लोबिन एक प्रोटीन युक्त वर्णक है जिसमें आयरन भी उपस्थित होता है हिमोग्लोबिन का मुख्य कार्य गैसीय परिवहन करना है यह ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करता है यह अस्थाई यौगिक निर्मित करता है। आरबीसी के निर्माण में विटामिंस सहायता करता है तथा आयरन भी सहायता करता है ।
लाल रक्त कणिकाओं का जीवनकाल 120 दिन का होता है आरबीसी की कोशिकाएं मरने के बाद प्लीहा द्वारा छानकर अलग की जाती हैं तथा मरी हुई कोशिकाओं को अपघटन के लिए यकृत के पास भेजा जाता है प्लीहा को आरबीसी का कब्रगाह तथा ब्लड बैंक भी कहा जाता है।
श्वेत रक्त कणिकाएं
श्वेत रक्त कणिकाएं कोशिकाओं में सर्वाधिक संख्या न्यूट्रॉफिल्स कोशिकाओं की होती है , जो एंटीबॉडीज निर्मित करते हैं
श्वेत रक्त कणिकाओं का एक नाम लिंफोसाइट भी है जो एंटीबॉडीज निर्मित करता है रक्त में इसके अत्यधिक विभाजन से रक्त कैंसर उत्पन्न होता है ।
प्लेटलेट्स
प्लेटलेट्स की कोशिकाएं अस्थिमज्जा में निर्मित होती हैं इसका पाया जाना मनुष्य के रक्त की एक विशेषता है इनका जीवन काल 7 - 8 दिन का होता है इनका प्रमुख कार्य रक्त का थक्का जमाने में सहायता करना तथा रक्त प्रवाह को बनाए रखने में सहायता करना है।
प्लाज्मा
प्लाज्मा में जल 93% तथा प्रोटीन 6% तथा 1% में यूरिया तथा अन्य कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थ होते हैं प्लाज्मा भाग में समस्त कणिकाएं एवं अन्य पदार्थ घुला हुआ होता है ।