कृत्य या कृत्य का लोप कब दण्डनीय है
- ‘कृत्य’ शब्द में ऐसा प्रत्येक कार्य सम्मिलित है जो मानव करता हो, जैसे – बोलना, चलना, फिरना, लिखना, फेंकना आदि। कृत्य के लोप से आशय है जानबुझकर किसी ऐसे कृत्य को न करना जो व्यक्ति द्वारा किया जाना अपेक्षित है। दूसरे शब्दों में, जब कानून के उपबन्ध किसी व्यक्ति पर कोई कार्य करने की अपेक्षा करता है और वह व्यक्ति यदि वह कार्य न करें तो वह दण्डनीय अपराध होगा।
- उदाहरण 1 – यदि ‘अ’ जो कि एक जेलर है और ‘ब’ जेल में कैदी है, तो जेल का मुख्य अधिकारी होने के नाते 'अ' का विधिक कर्तव्य है कि वह ‘ब’ को भोजन की खुराक देने की व्यवस्था करे और यदि इस कर्तव्य में लोप करता है जिसके कारण ‘ब’ की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी दशा में ‘अ’ सदोष मानव-वध के लिए अपराधी होगा।
- उदाहरण 2 - जहाँ एक व्यक्ति गम्भीर बीमारी की हालत में बिस्तर पर पड़ा हुआ है और ‘अ’ को उसकी देखभाल, परवरिश व खुराक आदि के लिए ‘वेतन’ पर नियुक्त किया गया है लेकिन यदि ‘अ’ उस रोगी को खुराक नहीं देता है जिसके परिणाम स्वरुप वह व्यक्ति मर जाता है, तो ऐसी स्थिति में ‘अ’ सदोष मानव-वध के अपराध का दोषी होगा।