कृत्य या कृत्य का लोप कब दण्डनीय नही है
- ‘क’ एक भिखारी है और ‘ख’ से उसकी मित्रता मात्र के सम्बंध है। यदि ‘क’ को जीवित रखने के लिए भीख नही मिलती तथा ‘ख’ ‘क’ को खाना न दे और ‘क’ मर जाय, तो इस दशा में ‘ख’ ने कोई अपराध नही है।
- ‘ब’ एक राहगीर सड़क पर जा रहा है और एक कुत्ता उसे काटने के लिए दौड़ता है और 'अ' को यह मालूम है कि कुत्ता खतरनाक है और वह 'ब' को मार डालेगा और फिर भी वह कुत्ते को नहीं बुलाता है। इस स्थिति में 'अ' उसी दशा में अपराधी होगा जब वह कुत्ते का मालिक हो, परन्तु यदि वह कुत्ते का मालिक नही है तो उसने कोई अपराध नहीं किया है।
- IPC की धारा 289 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने जानवर को जानबुझकर लापरवाही से उचित नियंत्रण में न रखे जिसके कारण लोगों को खतरा उत्पन्न हो जाए तो वह 6 माह के कारावास या रू. 1000/- के अर्थदण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
- किसी कार्य के दो परिणाम हो सकते हैं - (1) आन्तरिक परिणाम, तथा (2) बाह्य परिणाम। जहाँ कार्य करने वाला व्यक्ति स्वयं प्रभावित होता है, उसे आन्तरिक परिणाम कहते है और यह अपराध नही है, लेकिन जहाँ व्यक्ति के कृत्य का परिणाम अन्य लोगों पर प्रभाव डालता है, तो इसे बाह्य परिणाम कहा जार्गा, जो कि एक अपराध होगा। इसे निम्नलिखित उदाहरण से भलीभांति समझा जा सकता है –
उदाहरण - 'अ' अपनी सम्पत्ति को अपने मकान में स्वयं की अभिरक्षा में रखता है और फिर उसे उठाकर अन्यत्र रख देता है। यहाँ 'अ' ने अपनी सम्पत्ति को स्थानान्तरित करने का कृत्य किया है, परन्तु चूंकि इस कृत्य का उसके सिवाय किसी अन्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है इसलिए वह अपराध नहीं है।
परन्तु यदि उपर्युक्त उदाहरण में 'अ' अपनी सम्पत्ति को स्वंय की अभिरक्षा से निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को अमानत के रूप में रखने के लिए अन्तरित करता है और किसी दिन उस व्यक्ति की अनुपस्थिति में अपनी सम्पत्ति को उस व्यक्ति को बिना बताए इस नीयत से चुपचाप उठा लाता है कि वह उस व्यक्ति से इस सम्पत्ति का मुल्य वसूल सके, तो ऐसी दशा में 'अ' चोरी के लिए अपराधी होगा क्योंकि इस कार्य के परिणामस्वरूप अन्य व्यक्ति प्रभावित हुआ है और उसे हाँइ पहुँची है। परन्तु यदि इसी उदाहरण में 'अ' उस व्यक्ति की अनुपस्थिति में अपनी सम्पत्ति उठा लाता है और उस व्यक्ति को सूचना दे देता है, तो वह अपराधी नहीं होगा क्योंकि उसके कार्य के परिणामस्वरूप उस अन्य व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।