सीमित संसाधन एवं असीमित आवश्यकताओं के मध्य तालमेल स्थापित करने के लिए नियोजन की आवश्यकता पड़ी। नियोजन का सामान्य अर्थ क्या तथा कैसे करने से है, अर्थात साध्य एवं साधन के मध्य संतुलन स्थापित करने के लिए नियोजन की आवश्यकता पड़ी।
नियोजन के माध्यम से जहां एक और आर्थिक विकास को गति दिया जाना संभव हो पाता है। वहीं दूसरी और आधुनिकता पर बल दिया जाना संभव हो पाता है।
नियोजन के माध्यम से यह देखा जाता है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के संपन्न वर्ग तक ही सीमित न रह जाए बल्कि इसका लाभ समाज के सभी वर्गों को प्राप्त हो इसका ध्यान रखा जाता है।
नियोजन के माध्यम से न सिर्फ गरीबी उन्मूलन पर बल दिया जाता है बल्कि विकास से जुड़े विभिन्न सूचकांकों जैसे- मानव विकास सूचकांक, महिला विकास सूचकांक, आवास, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा आदि विषयों पर भी बल दिया जाता है।
नियोजन के माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था की विभिन्न कल्याणकारी लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है।
भारतीय नियोजन का संचालन मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत किया जाता है जो कि भारतीय संविधान के लोकतांत्रिक समाजवाद का एक परिणाम है। अतः नियोजन के अंतर्गत लोक संगठनों के साथ साथ निजी संगठनों की सहभागिता दिखाई देती है। भारतीय नियोजन प्रक्रिया का संचालन विभिन्न चरणों के माध्यम से किया जाता है।