भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का निर्धारण

चालू पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि समीक्षा के आधार पर आगामी पंचवर्षीय योजना के लिए प्रारूप उपागम प्रपत्र तैयार किया जाता था। जिसके अंतर्गत नियोजन के लक्ष्य को परिभाषित किया जाता था। योजना आयोग के द्वारा निर्धारित प्रारूप उपागम प्रपत्र को संघ मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। संघीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के उपरांत उपागम प्रपत्र को राष्ट्रीय विकास परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। राष्ट्रीय विकास परिषद की स्वीकृति के उपरांत उपागम प्रपत्र के आधार पर योजना आयोग केंद्र, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अपने स्तर पर नियोजन के प्रारूप को तैयार करने हेतु दिशा निर्देश दिया जाता था। इन इकाइयों के द्वारा अपने अपने स्तर पर नियोजन के प्रारूप को योजना आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाता रहा है। योजना आयोग का कार्यदल संबंधित इकाइयों से विचार-विमर्श करता था, तथा देश में उपलब्ध वित्तीय संसाधन एवं इनकी मांग के मध्य संतुलन स्थापित करने का कार्य करता था। योजना आयोग एवं संबंधित इकाइयों के मध्य सहमति के आधार पर पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को जनता के लिए प्रकाशित किया जाता था। पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को संघीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। संघ मंत्रिमंडल की स्वीकृति के उपरांत पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को राष्ट्रीय विकास परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। राष्ट्रीय विकास परिषद की स्वीकृत के पश्चात पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। संसद की स्वीकृति के उपरांत पंचवर्षीय योजना 5 योजनाओं में विभाजित कर दी जाती थी। तथा प्रत्येक वार्षिक योजना को बजट के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता था।

 परंतु वर्तमान समय में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग नियोजन के संदर्भ में अपना कार्य कर रहा है।

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