भारतीय संविधान Easy Notes - 29 (भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं)

क्रमशः..

Day - 29

  • सर आइवर जेनिंग्स ने भारतीय संविधान को ‘विश्व का सबसे बड़ा’ और ‘विस्तृत संविधान’ कहा जब की कुछ आलोचकगण इसे ‘वकीलों का स्वर्ग’ कहते है।
  • भारत का संविधान प्रभुत्वसम्पन्न, लोकतंत्रात्मक पंथनिरपेक्ष तथा समाजवादी है। प्रभुत्वसम्पन्न राज्य का तात्पर्य ऐसे राज्य से है जो किसी बाह्य नियंत्रण से मुक्त हो और जिस पर किसी अन्य देश की प्रभुता न हो, जो अपनी आन्तरिक एवं विदेश नीतियों का निर्धारण स्वयं करता हो तथा वह किसी अन्तर्राष्ट्रीय संधियां व समझौता को मानने के लिए बाध्य न हो। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के अन्तर्गत सरकार का पूरा अधिकार जनता में निहित रहता है। ऐसी शासन व्यवस्था के अन्तर्गत सरकार की स्थापना जनता द्वारा तथा जनता के लिए की जाती है। भारत का शासन सीधे जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा संचालित किया जाता है। पंथनिरपेक्ष का तात्पर्य ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता और वह न तो ही किसी धर्म को संरक्षण प्रदान करती है और न ही किसी धर्म या धार्मिक क्रियाकलापों का विरोध करती है। भारत में सभी धर्मों को समान आदर दिया जाता है और धर्म के आधार पर किसी मामले में भेद नहीं किया जाता है। भारतीय संविधान में पंथनिरपेक्षता को संविधान के प्रारम्भ से ही मान्यता दी गयी थी लेकिन 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा ‘पंथ निरपेक्ष’ शब्द को संविधान की उद्देशिका में शामिल करके धर्मनिरपेक्षता की और अधिक पुष्टि की गई। समाजवादी राज्य की स्थापना संविधान का मुख्य उद्देश्य है और इसकी अभिपुष्टि संविधान की उद्देशिका में समाजवादी शब्द को अन्तःस्थापित करके और कई अनुच्छेदों में संशोधन करके की गई है।

जारी...

मिलते है हम अगले दिन, इसी विषय पर फिर  चर्चा करने के लिये..

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