लियोनार्डो द विंची-2

लियोनार्दो जब किशोरावस्था में आए तो उनका परिवार इटली के मिलान शहर आ गया।घरवालों को लगता था कि लियोनार्दो बुद्धू किस्म का बच्चा है।पिता को लगा कि यह जीवन में कुछ नहीं कर पाएगा, इसीलिए लियोनार्दो को एक पेंटर के पास काम सीखने भेज दिया गया। बस वहीं से लियोनार्दो का पेंटर के तौर पर सफर शुरू हुआ।उन्होंने पहली बार अंडे की जगह ऑइल पेटिंग का प्रयोग किया।तभी पेंटर ने उनके महान कलाकार बनने की भविष्यवाणी कर दी ,लेकिन विंची का सफर पेंटिंग पर भी खत्म नहीं हुआ। असल में उनके भीतर की जिज्ञासा हर चीज का हल खोजती।पंछियों को देखकर उन्होंने हवाई जहाज का खाका तैयार कर दिया।विंची ने घोड़ों और इंसानों की हूबहू प्रतिमाएं भी बनाई। उन्होंने बताया कि दिल, यकृत और पेट कैसे काम करता है। विंची ने अद्भुत सुंदरता का समीकरण भी खोज लिया।इनके मुताबिक हर चीज में एक अनुपातिक संबंध होता है।
जैसे- चार अंगुलियों की चौड़ाई, हथेली के बराबर होती है।इंसान का कान उसके चेहरे का एक तिहाई होता है।उन्होंने पुरुष के शरीर के आकार के समीकरण हल कर दिये। सामान्यत: विंची को मोनालीसा तस्वीर के लिए जाना जाता है।लेकिन यह तो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का बस अंश मात्र है।विंची के कई समीकरण तो आज भी अनसुलझे हैं। वास्तव में वो दर्पण राइटिंग करते थे, यानी ऐसे लिखते थे कि आम लोगों को उसे पढ़ने के लिए दर्पण की जरूरत पड़े।लेकिन इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद दुनिया को लियोनार्दो की निजी जिंदगी के बारे में बहुत ही कम जानकारी है।विंची हमेशा इसे लोगों से छुपा कर रखते थे।

उपलब्धियों, मानसिक उलझनों और जिज्ञासा के बीच 2may 1519 को विंची ने दुनिया को अलविदा कहा।तब से लेकर अब तक करीब 500 साल गुजर चुके हैं लेकिन उनके जैसी दूसरी प्रतिभा पैदा नहीं हुई।

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