जीवाणु एक सूक्ष्म प्रोकैरियोटिक जीव है यह नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता क्योंकि आकार में बहुत छोटे होते हैं जीवाणु में पोषण मुख्य रूप से परजीवी प्रकार का होता है लेकिन कुछ जीवाणु सहजीवी एवं मृतोपजीवी प्रकार के भी होते हैं जीवाणु मित्र एवं शत्रु दोनों प्रकार के होते हैं इनमें केंद्रक अनुपस्थित होता है।
जीवाणु की खोज 1663 में एंटोनियोवान ल्यूवेनहॉक ने किया और सूक्ष्मदर्शी जीव कहा । एंटोनियो ल्यूवेनहॉक को bacteriology का पिता कहा जाता है ।
सर्वप्रथम बैक्टीरिया नाम 1829 में एहरेनवर्ग ने दिया था।
लुई पाश्चर ने जर्म सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसने बैक्टीरिया को रोग का कारण बताया था ।
रॉबर्ट कोच ने सर्वप्रथम पशुओं में होने वाली बीमारी एंथ्रेक्स तथा मनुष्य में होने वाली बीमारी तपेदिक के जीवाणु को सर्वप्रथम अलग-अलग पहचाना तथा इनका कृतिम संवर्धन भी किया ।
जीवाणु आकार के आधार पर 4 प्रकार के होते हैं -
- राड के आकार का
- गोलाकार
- सर्पिलाकार
- कामा के आकार का
आधुनिक मातानुसार जीवाणुओं में अलैंगिक प्रजनन के साथ साथ जीवाणुओं में लैंगिक प्रजनन भी पाया जाता है ।
अलैंगिक प्रजनन में प्रजनन अंग के अलावा शरीर के किसी भाग से एक जीव से दूसरे जीव का निर्माण हो जाता है, जबकि लैंगिक प्रजनन में प्रजनन की क्रिया लैंगिक अंग के द्वारा ही संपन्न होती है ।
जीवाणु में लैंगिक प्रजनन की 3 विधियां मानी जाती हैं -
- संयुग्मन
- जीन वाहन
- रूपांतरण
कुछ महत्वपूर्ण जीवाणु निम्नलिखित हैं -
राइजोबियम - यह जीवाणु दलहनी फसलों में उपस्थित होता है।
एसीटोबेक्टर एसिटाई नामक जीवाणु गन्ने की सुक्रोज शर्करा को किण्वित कर देता है जिससे सिरका प्राप्त होता है।
जीवाणुओं से खाद्य पदार्थ निर्मित किए जाते हैं । जैसे- लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु दूध के केरोसिन प्रोटीन को इकट्ठा करके जमा देता है तथा उसे किण्वित करता है
जिससे दही प्राप्त होता है।
जीवाणुओं में प्रोबायोटिक्स फूड प्राप्त होता है जैसे दही इसमें पाचन क्रिया को ठीक करने वाले जीवाणु मौजूद होते हैं दवाओं के माध्यम से भी प्रोबायोटिक फूड प्राप्त किया जाता है ।
बैक्टीरिया से होने वाले कुछ मुख्य रोग निम्नलिखित हैं-
- क्षय रोग
- हैजा
- डिप्थीरिया
- काली खांसी
- कुष्ठ रोग
- सिफलिस
- जुखाम
- टिटनेस