नवीन राज्यों का उदय और अंग्रेजों का विस्तार । भाग - 3

शिराजुद्दौला (1756-1757) ई.

शिराजुद्दौला का बचपन का नाम मिर्जा मोहम्मद था।
शिराजुद्दौला जैसे ही गद्दी पर बैठा उसकी ढाका वाली मौसी घसीटी बेगम और मौसेरा भाई (पूर्णिया) शौकतगंज अंग्रेजों के साथ मिलकर इसके विरुद्ध षड्यंत्र की योजना बनाई । जिसकी शुरुआत फोर्ट विलियम की किलेबंदी से हुई जिसके लिए शिराजुद्दौला द्वारा रोका गया लेकिन अंग्रेजों ने आदेश का पालन नहीं किया । जिससे नाराज हो कर 4 जून 1756 को शिराजुद्दोला ने कासिम बाजार पर अधिकार कर लिया और आगे बढ़कर 15 जून 1756 को कलकत्ता का घेरा डाला । यहां का अंग्रेज गवर्नर रोजर डेक फुल्टा द्वीप भागा जबकि हालवेल ने आत्मसमर्पण किया और इसी दौरान इसने एक मनगढ़ंत कहानी रची जिसके तहत 20 - 21 जून 1756 को 146 अंग्रेजों को शिराजुद्दौला द्वारा एक काल कोठरी में बंद किया गया । जिसमें अगले दिन मात्र 23 लोग जिंदा मिले जिसमें एक हालवेल भी था ‌‌।‌ इस मनगढ़ंत कहानी को किसी भी भारतीय इतिहासकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया ।

दूसरी और शिराजुद्दोला द्वारा कलकत्ता का अधिकार कर इसका नाम बदलकर अलीनगर रखा तथा मणिकचंद को यहां का प्रभारी नियुक्त किया गया ।

उक्त घटना की जानकारी जैसे ही मद्रास पहुंची यहां से दो बड़े अधिकारी क्लाइव और वाटसन कलकत्ता की ओर बढ़े जहां पहुंचकर इन अधिकारियों ने मणिकचंद को अपनी ओर मिलाया । इस प्रकार शिराजुद्दौला के हाथ से कलकत्ता निकला ‌। जिससे मजबूर होकर अंग्रेजों के साथ अलीनगर की संधि करनी पड़ी।

     आगे है अभी अलीनगर की संधि, अंग्रेजों की नई योजना, प्लासी का युद्ध आदि ।

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