दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : प्रारम्भिकी (धारा 1-5) - 11

क्रमशः....

  • (xi) धारा (r) के अनुसार – पुलिस रिपोर्ट से पुलिस अधिकारी द्वारा 173(2) के अधीन मजिस्ट्रेट को भेजी गई रिपोर्ट अभिप्रेत है। वस्तुतः इस तरह की रिपोर्ट में अन्वेषण का निष्कर्ष सम्मिलित होता है। पुलिस अधिकारी इस तरह की रिपोर्ट उस मजिस्ट्रेट को देता है जो कि अपराध का संज्ञान करने के लिए सक्षम है।
  • (xii) धारा 2(v) के अनुसार – लोक अभियोजक (Public Prosecutor) से धारा 24 के अधीन नियुक्त व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत लोक अभियोजक के निर्देशों के अधीन कार्य करने वाला व्यक्ति लोक अभियोजक की कोटि में सम्मिलित होंने :
    1. ऐसा व्यक्ति जिसे दण्ड प्रक्रिया की धारा 24 के अधीन लोक अभियोजक के रूप में नियुक्ति किया गया है, तथा
    2. वह व्यक्ति जो लोक अभियोजक के अधीन कार्य कर रहा है।
  • (xiii) धारा 2(w) के अनुसार – समन मामला (Summons case) से ऐसा मामला अभिप्रेत है जो किसी अपराध से सम्बन्धित है और वारण्ट मामला नहीं है।
  • (xiv) धारा 2 (x) के अनुसार – वारण्ट मामला (Warrant Case) से ऐसा मामला अभिप्रेत है जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक के कारावास से दण्डनीय किसी अपराध से सम्बन्धित है।
  • समन तथा वारण्ट मामले में अंतर उस दण्ड पर आधारित है जो उन मामलों में दिया जा सकता है। समन मामला ऐसे अपराधों से सम्बंधित होता है जो जुर्माना या दो वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय अपराध है या दोनों से दण्डनीय अपराध है शेष सभी मामले वारंट मामले कहलाते है।

आगे और भी है ... 

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