दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : प्रारम्भिकी (धारा 1-5) - 12

क्रमशः ... 

  • उल्लेखनीय है कि यदि किसी अभियुक्त ने एक से अधिक अपराध किया हो, तो मामले को वारंट या समन का मामला निर्धारित करने के लिए उन समस्त अपराधों के दण्ड के योग को आधार नहीं माना जाएगा। यदि ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए निर्धारित दण्ड अलग-अलग दो वर्ष से अधिक नहीं है, तो ऐसे समस्त अपराधों को समन मामला माना जाएगा। परंतु यदि इन विभिन्न अपराधों में एक भी अपराध पृथक रूप से वारंट का मामला बनता है तो उस स्थिति में समस्त अपराधों को वारंट मामला माना जाएगा।
  •  संज्ञेय मामले में पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वारण्टके गिरफ्तार कर सकती है जबकि असंज्ञेय मामलों में बिना वारण्ट के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। संज्ञेय अपराधों में बिना वारण्ट के गिरफ्तार करने का एकमात्र कारण यह है कि ये अपराध गम्भीर एवं संगीन प्रकृति के होते  है अतः अभियुक्त कहीं बचकर भाग न जाये एवं अपराधों के प्रमाणों को नष्ट न कर दे इसलिये पुलिस ऐसे मामलों का अन्वेषण शुरू कर देती है।
  • संज्ञेय मामलों में कार्यवाही करने के लिए परिवाद की आवश्यकता नहीं होती है जबकि असंज्ञेय मामलों में कार्यवाही का प्रारम्भ परिवाद से होता है।
  • पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसे व्यक्ति को वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जा सकता है जो प्रतिभूति देने में असफल रहता है अथवा जिसने पुलिस अधिकारी की उपस्थिति अथवा दृष्टि में कोई अपराध कारित किया है।

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