भारतीय संविधान Easy Notes - 30 (भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं)

क्रमशः,,

Day - 30

  • भारतीय संविधान द्वारा स्वतंत्र न्यायपलिका की स्थापना की गयी है। न्ययाधीशों की नियुक्ति, वेतन, भत्ता तथा पद से हटाये जाने के सम्बन्ध में संविधान में स्पष्ट प्रावधान किया गया है, जिस कारण सरकार उन पर दबाव नहीं डाल सकती।
  • भारतीय संविधान भारत में विधि के शासन की स्थापना करता है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 13, 20, 21, 22, 32, 226, तथा 256 में व्यापक प्रावधान किया गया है। भारत में संविधान सर्वोच्च है और इस कारण कोई भी व्यक्ति या अधिकारी संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकता। भारत में विधि के शासन को नैसर्गिक न्याय का भाग माना जाता है तथा राज्य के प्रत्येक अंग विधि के शासन से नियमित तथा नियंत्रित होते है।
  • भारत का संविधान भारत में संसदीय पध्दति की सरकार की व्यवस्था करता है। संसदीय व्यवस्था में सरकार विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। केन्द्र की सरकार लोकसभा के प्रति तथा राज्यों की सरकारे विधानसभाओं के प्रति उत्तरदायी होती है और प्रधानमंत्री तथा राज्यों के मुख्यमंत्री क्रमशः लोकसभा के सदस्यों तथा विधानसभा के सदस्यों के द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं।
  • भारतीय संविधान के निर्माताओं ने ब्रिटिश संविधान के अन्तर्गत स्वयं अनेक अत्याचार सहन किये थे, अतः उनके द्वारा शासन की शक्तियों को मर्यादित करने की आवश्यकता अनुभव की गई। अतः निर्माताओं ने संविधान में मूल अधिकार को समाविष्ट किया तथा इसे नागरिक तथा गैर-नागरिक दोनों को प्रदान किये गये। भारत के संविधान में अन्तर्विष्ट मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान से लिये गये हैं। ऐसे अधिकारों का तात्पर्य उन अधिकारों से है, जो मनुष्यों के लिए नैसर्गिक हों तथा मनुष्यों को जन्म से ही प्राप्त हों। संविधान में नागरिकों को न केवल मूलाधिकार को प्रदान किया गया बल्कि इन मूलाधिकारों के प्रवर्तन की पर्याप्त व्यवस्था न्ही की गई है। स्मरणीय रहे कि भारतीय नागरिकों को प्रदान किये गये मूलाधिकार अबाध नहीं है बल्कि उन पर अनेक प्रकार के प्रतिबन्ध भी लगाये जाते हैं।
  • भारतीय संविधान इस अर्थ में विशिष्ट है कि इसमें नागरिकों के मूल कर्तव्य को अन्तर्विष्ट किया गया है। संविधान के प्रवर्तन के समय संविधान में इन कर्तव्यों को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन मूल कर्तव्यों को 42 वें संविधान (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया।
  • भारत के संविधान में एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का सपना संजोया गया है।यहेऐ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इच्छा एवं आकांक्षा थीं। संविधान के भाग -4 में ‘राज्य की नीति के निदेशक तत्वों’ का समावेश किया गया है, जो राज्य के प्रशासन के लिए मूलभूत हैं तथा जिसका पालन करना राज्य का पवित्र कर्तव्य हैं। इन निदेशक तत्वों के माध्यम से देश में कल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रावधान किया गया है। ग्लेविन आस्टिन – ने तो इसको ‘राज्य की आत्मा’ कहकर पुकारा है। इसी संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि भाग – 4 ‘भारतीय संविधान की आत्मा’ है।

जारी...

मिलते है हम अगले दिन, इसी विषय पर फिर  चर्चा करने के लिये..

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