मूल राशियों का इतिहास
• भौतिक विज्ञान की राशियां जिन्हें व्यक्त करने के लिए अन्य राशियों की जरूरत नहीं होती अर्थात जिन्हें अन्य राशियों की सहायता के बिना मापना तोलना संभव हो उन्हें मूल राशि कहते हैं।
प्राचीन समय में भौतिक राशियों को मापने के लिए कोई सर्वमान्य इकाई नहीं थी क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर अलग - अलग विधियां प्रचलित थी। यह विधियां एक छोटे क्षेत्र तक तो सही थी लेकिन जब व्यापार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने लगा तो इन अलग-अलग विधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भ्रम की स्थिति बनने लगी। इसी कारण अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वमान्य भौतिक राशियों की इकाइयों होना आवश्यक हो गया।
• इस कार्य के लिए मई 1875 में यूरोपीय देशों की एक बैठक फ्रांस की राजधानी पैरिस के सेवर्स नामक स्थान पर हुई। इस बैठक में उपस्थित वैज्ञानिकों ने लंबाई, द्रव्यमान एवं समय को मूल राशि के रूप में स्वीकार करते हुए मीटर समझौते के प्रारूप को बनाकर उस पर हस्ताक्षर किए।
• 1875 के मीटर समझौते में लंबाई द्रव्यमान एवं समय को मूल राशि माना गया। 1960 में इस सूची में ऊष्मागतिक तापमान (thermodynamic temperature) , विद्युत धारा (current electricity) तथा ज्योति तीव्रता (luminous intensity) को भी इसमें जोड़ दिया गया।
• पदार्थ की मात्रा (amount of the substance) को 1971 में मूल राशि में शामिल किया गया था। इसी समय समतल कोण ( plane angle) तथा घण कोण (solid angle) को अनुपूरक (supplementry ) मूल राशि माना गया लेकिन मापतोल की अंतरराष्ट्रीय समिति ने 1995 में इन्हें व्युत्पन्न राशि माना लिया गया।
• वर्तमान में कुल मिलाकर साथ मूल राशियां और दो अनुपूरक मूल राशियां है।
मूल राशियों के मात्रक एवं संकेत
| मूल राशि(fundamental quantity ) |
मात्रक (unit) |
संकेत (symbol) |
| लंबाई (length) |
मीटर |
m |
| द्रव्यमान (mass) |
किलोग्राम |
kg |
| समय (time) |
सेकंड |
s |
| उष्मागतिक ताप (Thermodynamics temperature) |
केल्विन |
K |
| विद्युत धारा (current electricity) |
एंपियर |
A |
| ज्योति तीव्रता (luminous intensity) |
कैंडेला |
Cd |
| पदार्थ की मात्रा (amount of the substance) |
मोल |
mol |
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