भारत का संघीय स्वरूप भाग-2 जारी
यदि भारत के संघीय स्वरूप के संबंध में भारत की बात की जाए तो भारतीय संविधान निर्माताओं ने बहुत ही चतुराई एवं सूझ - बूझ दिखाते हुए संघ का चुनाव किया। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (जो संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य भी थे) के अनुसार संघ को चुनने के दो कारण मुख्य थे -
1. भारत विभिन्न राज्यों के मध्य किसी अनुबंध (contract) का परिणाम नहीं है अर्थात राज्य अपनी इच्छा से भारत में शामिल हुए हैं। राज्यों को किसी बल प्रयोग या किसी कारार के द्वारा भारत में शामिल नहीं किया गया है। अतः भारतीय संघ अमेरिकी संघ की तरह अनुबंधों का परिणाम नहीं है।
2. किसी भी राज्य को स्वेच्छा से संघ से अलग होने का अधिकार नहीं दिया गया। अर्थात स्वेच्छा से भारत में शामिल हुए हैं तो इसका अर्थ कदापि यह नहीं है कि वह कभी भी स्वेच्छा से भारतीय संघ से अलग हो सकेंगे।
इन्हीं कारणों से भारतीय संविधान इस विषय पर दो भागों में बांटते हुए दिखाई देता है।
— K c व्हेअर के अनुसार भारतीय संविधान मूल रूप से एकात्मक संविधान है और उसमें कुछ संघ की विशेषताएं भी शामिल हैं। इसलिए उन्हें भारतीय संविधान को अर्द्ध संघात्मक संविधान कहा है।
— आईवर जेनिंग्स के अनुसार भारत एक ऐसा संघ है जिसमें केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति पाई जाती हैं।
अगले भाग में हम संघात्मक और एकात्मक राज्य की विशेषताओं के बारे में पढेंगे।