अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) लाल सूची

संकटग्रस्त जातियों की IUCN की लाल सूची सन् 1963 में गठित विश्व-भर में पौधों और पशुओं की जातियों की संरक्षण स्थिति की सबसे व्यापक तालिका जिसे IUCN लाल सूची या RED DATA सूची भी कहते हैं।क्षेत्रीय लाल सूचियों की एक आईयूसीएन शृंखला विश्व के विभिन्न देशों तथा संगठनों द्वारा किसी एक राजनीतिक प्रबंधन इकाई के अंतर्गत जातियों के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन करके तैयार की जाती हैं।अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ  विश्व-स्तर पर विभिन्न जातियों की संरक्षण-स्थिति पर निगरानी रखने वाला सर्वोच्च संगठन है। 
IUCN की RED DATA सूची में हर जीव जाति को नौ में से किसी एक श्रेणी में डाला जाता है।यह श्रेणीकरण उनकी कुल आबादी, आबादी में गिरावट के दर, भौगोलिक विस्तरण के क्षेत्र और उनके क्षेत्र से विलुप्त होने के आधार पर किया जाता है।

IUCN की 9 श्रेणियाँ निम्नवत् हैं-

1-  विलुप्त :- जिस जाति का कोई भी जीवित सदस्य नहीं बचा है।

2-वन विलुप्त:- जो जाति वनों से पूर्णतः खत्म हो चुकी है और इसके बचे हुए सदस्य केवल चिड़ियाघरों या अपने मूल निवास स्थान से अलग किसी कृत्रिम निवास स्थान पर ही जीवित हैं।

3- घोर संकटग्रस्त :- जिस जाति का वनों से विलुप्त होने का घोर खतरा बना हुआ है।

4- संकटग्रस्त :-जिस जाति का वनों से विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है।

5- असुरक्षित:- जिस जाति की वनों में संकटग्रस्त हो जाने की संभावनाएं है।

6- संकट निकट :-जिस जाति की निकट भविष्य में संकटग्रस्त हो जाने की संभावनाएं होती हैं।

7- संकटमुक्त :- जिन जातियों को बहुत कम खतरा है एवं बड़ी तादाद और विस्तृत क्षेत्र में पाई जाती हैं।

8- आंकड़ों का अभाव:- जिस जाति के बारे में आंकड़ों की कमी से उसकी संरक्षण की स्थिति और संकट का अनुमान नहीं लग पाता।

9- अनाकलित :-जाति की संरक्षण स्थिति का IUCN के संरक्षण मानदंड पर आँकन अभी नहीं किया गया है।

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