जल -- परिवहन

प्राचीन काल में भारत में जल परिवहन के महत्वपूर्ण साधन थे अंग्रेजों के शासन काल में हमारे नव परिवहन की दशा सोचनीय हो गई। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात परिवहन की उन्नत के प्रयास किए गए। भारत को अपनी विशाल तट रेखा तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित दीप उनकी सुरक्षा करनी पड़ती है। टट्टी तथा गहरे सागरी भागों में मत्स्य व्यवसाय का विकास करना भी अनिवार्य है तट के साथ साथ 12 समुद्री मील तक विस्तृत सागरी क्षेत्र पर भारत की प्रभुसत्ता है। सागरी तट से दूर गहरे सागर भागों से आज हम खनिज के तेल का खनन कर रहे हैं भारत के आर्थिक क्षेत्र का विस्तार तट के साथ साथ 200 किलोमीटर की दूरी तक है जिसका क्षेत्रफल लगभग 20 लाख वर्ग किलोमीटर है।

जल मार्ग परिवहन का सबसे पुराना शुगम और सस्ता साधन है। लगभग 90% भारतीय विदेशी व्यापार जल मार्ग द्वारा कियाा जाता है। क्षेत्रीय विस्तार की दृष्टि से भारतीय जल परिवहन को दो भागों में विभाजित किया गया है।

आंतरिक जलमार्ग--- भारत में नव्य-- नदियों की लंबाई केवल 9600 किलोमीटर है जिसमेंं से 1800 किलोमीटर जलमार्ग का वास्तविक रूप में उपयोग किया  जाता है।  प्रमुख  जलमार्ग इस प्रकार हैं - गंगा, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां, गोदावरी, कृष्णा और उनकी सहायक नदियां, केरल की पश्चिमी तटीय नहरे तथाााा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बकिंघम नहर ओडिशाा में मंदाकिनी में डेल्टा नहर तथा गोवा में जुआरी नहर।

Posted on by