लेखानुमोदन सरकार के बजट के व्यय पक्ष मात्र से सम्बद्ध होता है , जबकि अन्तरिम बजट में व्यय तथा आवती दोनों सम्मिलित होते हैं । चर्चा कीजिए ।

व्याख्या:-

लेखानुमोदन ( Vote - on - account ) संसद में विनियोग विधेयक ( Appropriation bill ) पारित होने के पश्चात् ही संचित निधि में से कोई रकम सरकार द्वारा निकाली जा सकती है । यदि सरकार को इस विधेयक के पारित होने के पहले ही रुपयों की आवश्यकता हो तो , ऐसी स्थिति में लोकसभा अनुच्छेद 116 ( क ) के अन्तर्गत लेखा अनुदान / लेखा अनुमोदन पारित कर सरकार को एक अग्रिम राशि मंजूर कर सकती है । अन्तरिम बजट ( Interim Budget ) अन्तरिम बजट शब्दावली का प्रयोग भारतीय संविधान में नहीं है । अन्तरिम बजट सरकार द्वारा ऐसी स्थिति में पेश किया जाता है जब सरकार पूर्ण बजट प्रस्तुत करने की स्थिति में नहीं होती । जैसे या तो सरकार कार्यवाहक सरकार है या सरकार का गठन ऐसे समय पर हुआ है, जब उस वित्तीय वर्ष का पूर्ण बजट पेश नहीं किया जा सका है । ऐसी परिस्थिति में सरकार द्वारा अन्तरिम बजट पेश किया जाता है । अन्तरिम बजट के बाद पूर्ण बजट पेश किया जाना आवश्यक है । लेखानुमोदन में केवल व्यय का हिसाब होता है और अन्तरिम बजट आय और व्यय दोनों का लेखा रखता है , लेकिन यह सत्य नहीं है कि लेखानुमोदन का प्रयोग स्थायी सरकार द्वारा किया जाता है , जबकि अन्तरिम बजट का प्रयोग कार्यवाहक सरकार द्वारा किया जाता है ।

Posted on by