उच्चतम न्यायालय की स्वायत्तता
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय भारत के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश से विचार - विमर्श करना पड़ता है । न्यायाधीशों का वेतन भारत की संचित निधि पर आरोपित होता है , जिस पर विधानमण्डल को अपना मत नहीं देना होता है ।
संविधान के अनुच्छेद 124 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन को वर्णित किया गया है । उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति को राजनीति के क्षेत्र से अलग करके यह अपेक्षा की गई कि राष्ट्रपति इस विषय में भारत के मुख्य न्यायाधीश से राय - मशविरा लेंगे । उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और अन्य कर्मचारियों के वेतन , भत्ते आदि भारत की संचित निधि पर भारित होंगे , अर्थात् संसद उन पर मतदान नहीं कर सकती अनुच्छेद 146 ( 3 ) , वहीं अनुच्छेद 124 ( 4 ) और न्यायाधीश जाँच अधिनियम , 1968 का सम्मिलित प्रभाव यह है कि न्यायाधीश को हटाने के लिए महाभियोग ( Impeachment ) की प्रक्रिया अपनाई जाती है । इस सम्बन्ध में संसद को ये शक्तियाँ दी गई हैं कि वह एक सम्बोधन और एक न्यायाधीश के व्यवहार या अक्षमता की जाँच या सबूत के प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया को नियन्त्रित करें ।