भारतीय राज्यों का पुनर्गठन
-आजादी के समय भारत में राजनैतिक इकाइयां दो भागों में बटी हुई थी - ब्रिटिश भारत तथा देसी रियासतें।
भारत के विभाजन से पहले भारत में कुल 568 देशी रियासतें थी जबकि ब्रिटिश भारत में 11 प्रांत और 4 कमिश्नरियां शामिल थी। ब्रिटिश भारत के आंतरिक और बाहरी मामलों पर ब्रिटिश ताज का पूरी तरह से नियंत्रण था वहीं देशी रियासतों की रक्षा और विदेशी मामलों से संबंधित अधिकार ब्रिटिश भारत के पास थे और बहरी मामलों में ब्रिटिश राज का नियंत्रण था।
- आजादी के बाद 3 रियासतों जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी देसी रियासतों ने भारत या पाकिस्तान में शामिल होना स्वीकार कर लिया। कुछ समय बाद जूनागढ़ को जनमत संग्रह के द्वारा (20 फरवरी 1948)को , हैदराबाद को पुलिस कार्यवाही के द्वारा सितंबर 1948 को, जम्मू कश्मीर को जम्मू कश्मीर रियासत के शासक ने पाकिस्तानी कबायलिओं के आक्रमण के कारण भारत में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
{ देसी रियासतों को भारत में विलय का श्रेय उस समय के गृहमंत्री वल्लभ भाई पटेल को दिया जाता है। }
- स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश प्रांतों और देशी रियासतों को एक साथ जोड़कर, भारतीय राज्यों को चार श्रेणियों क , ख, ग, घ में बांटा गया। इनकी कुल संख्या 29 से थी।