भूगोल में पृथ्वी के अंतराल का अध्ययन महत्वपूर्ण होता है । पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना की जानकारी प्राप्त करना एक कठिन कार्य है । पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में प्राप्त ज्ञान अप्रत्यक्ष प्रमाण पर आधारित है । इसके जानने के स्रोत निम्नलिखित हैं -
१.अप्राकृतिक तथा प्राकृतिक
इसके अंतर्गत खनन तेल, कुआं आदि से जानकारी प्राप्त की जाती है परंतु यह अधिकतम 8 से 10 किलोमीटर तक गहरे होते हैं जबकि हमारी पृथ्वी की गहराई 6371 किलोमीटर है ।
प्राकृतिक संसाधनों के अंतर्गत ज्वालामुखी एवं भूकंप आते हैं । ज्वालामुखी क्रिया से स्पष्ट है कि पृथ्वी के नीचे एक भाग ऐसा है जहां मैग्मा तरल अवस्था में है । पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में सर्वाधिक जानकारी भूकंप की लहरों से होता है । पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में प्राचीन जानकारी निम्नवत है -
स्वमेश के अनुसार :-
इन्होंने पृथ्वी की ऊपरी परत को सियाल(SiAl) अधापरत को सीमा(SiMa) तथा केंद्रीय परत को निफे(NiFe) बताया तथा यह भी बताया कि घनत्व बाहर से अंदर की ओर बढ़ता जाता है ।
२. सामान्य मत :-
सामान्य रूप से पृथ्वी की तीन परतें पाई जाती हैं । बाहरी परत को लिथोस्फीयर मध्य परत को पायरोस्फेयर तथा आंतरिक परत को Barrysphere कहा जाता है ।
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