इसके पिछले भाग में हमने सामान्य मत तक जानकारी प्राप्त की थी । अब इसके आगे ...
३. अभिनव मतानुसार:-
पृथ्वी की आंतरिक संरचना के संबंध में उपरोक्त वैज्ञानिक हैं परंतु आधुनिक मत के द्वारा इसका सही विवरण प्रस्तुत होता है ।
आधुनिक मत के अंतर्गत भू गणितीय तथा भू भौतिकीय के अध्ययन को सम्मिलित किया जाता है । इनको आधार भूकंप पर लहरों की गति एवं उनके भ्रमण पथ में आने वाले परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन व विश्लेषण है । भूकंप की लहरों की गति एवं भ्रमण पथ में परिवर्तन के अनुसार पृथ्वी की आंतरिक भाग को 3 पदों में बांटा गया है । 1.क्रस्ट 2.मेंटल तथा 3. कोर
क्रस्ट:-
यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत है, जो अवसादी, ग्रेनाइट तथा बेसाल्ट चट्टानों का बना है । इसके नीचे जाने पर तापमान बढ़ता है । इसमें ग्रेनाइट एवं बेसाल्ट परत के बीच क्रोनेराड विसंगति तल पाया जाता है । क्रस्ट के नीचे का भाग Asthenosphere कहलाता है । जिसे मोह विसंगति तल भी कहा जाता है । क्रस्ट में सियोल की प्रधानता होती है । इसका घनत्व 2.9 होता है ।
मेंटल (MANTLE) :-
यह पृथ्वी की मध्यवर्ती परत होती है जिसके 2 भाग होते हैं । वह ऊपरी मेंटल तथा निचली मेंटल इन दोनों के मध्य में रेपटी नामक विसंगत पाया जाता है । मेंटल 100 से 2900 किलोमीटर तक पाई जाती है । क्रोड तथा मेंटल के मध्य गुटेनबर्ग विसंगत चल पाया जाता है ।
कोर (Core):-
यह पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग होता है, जो गुटेनबर्ग विसंगत तल से पृथ्वी के केंद्र तक अर्थात 2900 से 6371 किलोमीटर तक पाई जाती है । इसके 2 भाग हैं - वाह्य तथा आंतरिक क्रोड । वाह्य क्रोड तरल अवस्था में तथा आंतरिक क्रोड ठोस अवस्था में वाह्य क्रोड तथा आंतरिक क्रोड के मध्य एक संक्रमण सिल पेटी पाई जाती है । जिसे लेहमन विसंगत तल कहा जाता है ।
लेख अभी जारी है ....