भारतीय दण्ड संहिता : अपराध के विभिन्न चरण - 01

अपराध के विभिन्न चरण

  1. आशय (Intention)
  2. तैयारी (Preparation)
  3. प्रयत्न (Attempt)
  4. अपराध की पूर्णता (Completion of offence)

आशय

  • अपराध का प्रथम स्तर ‘आशय’ है।
  • कोई भी अपराध बिना आशय के घटित नहीं होता और यदि घटित होता भी है तो वह दुर्घटना या दुर्भाग्य के बचाव के अधीन क्षम्य होता है।
  • आशय अर्थात् दुराशय अपराध का प्रथम चरण है क्योंकि किसी भी अपराध को कारित करने के लिए अपराधी सबसे पहले उसे कारित करने का इरादा करता है लेकिन आशय मात्र से अपराध नहीं हो जाता जब तक उसे किसी न किसी सीमा तक कार्यान्वित न किया गया हो।
  • सामान्यतः अपराध का प्रथम स्तर आशय दण्डनीय नही है किन्तु आपराधिक षडयंत्र के अपराध में केवल आशय ही दण्डनीय माना गया है।

तैयारी

  • अपराध का द्वितीय स्तर तैयारी है, जो सामान्यतः दण्डनीय नहीं है।
  • अपराध कारित किये जाने के लिए आशय के बाद की सीढ़ी “तैयारी” है। बिना तैयारी के कोई भी अपराध कारित नहीं किया जा सकता। दूसरे शब्दों में, तैयारी से अभिप्राय अपराध को पूर्ण करने के लिए साधनों को एकत्रित करना। उदाहरणार्थ, यदि कोई व्यक्ति अपने शत्रु को हाँइ पहुचाँने के लिए उसके घर में आग लगाने का आशय रखता है, तो स्वाभाविक है कि वह इस हेतु माचिस, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, कपड़े आदि इकट्ठा करने की तैयारी करेगा ताकि वह अपने कृत्य को कार्यान्वित कर सके। स्मरणीय रहे कि तैयारी मात्र से व्यक्ति को अपराधी नही माना जा सकता जब तक कि वह उस कृत्य को किसी न किसी सीमा तक कारित करने का प्रयास न करे। किन्तु इसके अपवाद भी है जिसमें अपराध की तैयारी मात्र करना ही दण्डनीय होता है।

आगे और भी है .... 

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