भारतीय दण्ड संहिता : अपराध के विभिन्न चरण - 02

क्रमशः ....

तैयारी कब दण्डनीय है

साधारण तैयारी को दण्डनीय नही माना गया है, लेकिन कुछ तैयारियाँ ऐसी है जो संहिता के अन्तर्गत दण्डनीय मानी गई है। वे निम्नलिखित है –

  1. भारत सरकार के विरुध्द युध की तैयारी करना (धारा 122)
  2. भारत के साथ शान्तिपूर्ण व्यवहार रखने वाले राष्ट्र में आतंक मचाने की तैयारी करना (धारा 126)
  3. जाली सिक्के बनाने की तैयारी करना (धारा 235)
  4. डकैती की तैयारी करना (धारा 399)

प्रयास / प्रयत्न

  • अपराध की तीसरी अवस्था ‘प्रयास’ है। प्रयास शुरू करते ही अपराध प्रारम्भ हो जाता है चाहे भले ही प्रयास पूरा हो सके या न हो सके अथवा उसमें सफलता मिले या न मिले।
  • आशय और तैयारी मिलकर किसी व्यक्ति को कोई अपराध कारित करने के लिए उत्प्रेरित करते है। इसे ‘प्रयत्न’ या ‘प्रयास’ कहते हैं और सभी प्रयत्न को भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत दण्डनीय माना गया है। ‘प्रयत्न’ ही किसी अपराध की महत्वपूर्ण अवस्था है, क्योंकि प्रयत्न किये जाने पर ही कोई अपराध कारित किया जा सकता है अन्यथा नहीं।
  • ‘तैयारी’ पूर्ण होने के पश्चात ‘प्रयत्न’ आरम्भ होता है।
  • संहिता की निम्नलिखित अवस्था में अपराध करने के प्रयत्न को पृथक् रूप से अपराध माना गया है –
    1. हत्या करने का प्रयत्न (धारा 307)
    2. आपाराधिक मानव-वध करने का प्रयत्न (धारा 308)
    3. आत्म-हत्या करने का प्रयत्न (धारा 309)
    4. लूट करने का प्रयत्न (धारा 393)

आगे और भी है .... 

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